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Monday, February 18, 2019

Share market me loss kaise hota hai. / How to loss your money in stock market

शेयर मार्केट में लॉस कैसे होता है? How to loss your money in stock market.

शेयर मार्किट पैसे का समंदर है, पर यहाँ से मोती उन्हीं को मिलता है जो इसकी विधि जानते हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग की बात तो छोड ही दें, जहाँ सफलता सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत लोगों को मिलती है।यहां निवेश (investment) करके भी लोग नुकसान उठाते हैं। आइये जानते है उन कारणों के बारे में जिनके चलते निवेश करके भी शेयर मार्केट से नुकसान उठाना पड़ता है।
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शेयर मार्केट में लॉस (loss) के 10 कारण

1. मार्केट की जानकारी ना होना -

ज्यादातर लोग शेयर मार्केट की जानकारी नहीं रखते और सोचते हैं यहाँ भी प्रॉपर्टी, गोल्ड की तरह निवेश करके आसानी से पैसा बनाया जा सकता है. पर शेयर मार्केट में निवेश पूरी तरह अलग है। यहां आपकी पूंजी को बढ़ने या टूटने में ज्यादा समय नहीं लगता। इसलिए शेयर मार्केट में उतरने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

इसके उतार-चढ़ाव के पैटर्न को जानना जरूरी है अन्यथा आपको निराशा ही हाथ लगेगी।समझ कर निवेश किया तो पूँजी बढ़ने में भी समय नहीं लगेगा। यहां अगर जल्दी gain है तो pain भी उतना ही बड़ा है। सोच समझ कर निवेश करेंगे तो रिस्क मैनेजमेंट कर पाएंगे। निवेश करते समय ये ध्यान में रखे की आप अपने बचत के अतिरिक्त पैसों को ही Stock Market में लगायें।

       मनी मैनेजमेंट को समझना शेयर मार्केट में बने रहने के लिए सबसे जरूरी है. इसके लिए पढ़े -
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2. शेयर के चुनाव में चूक होना -

शेयर मार्केट में निवेश के लिए आपको एक या अधिक कंपनियों के शेयर का चुनाव करना होता है अगर इसमें चूक हुई तो आपको लॉस होना निश्चित है। कैसी कंपनियों का चुनाव करें - जो कंपनियां लंबे समय से मार्केट में है जिनका मैनेजमेंट अच्छा है जिनकी प्रॉफिट रिपोर्ट बढ़िया है, ऐसी कंपनियों का चुनाव करना होगा।

इसके विपरीत जिन कंपनियों के प्रमोटर अपने सुरक्षित शेयर को बेच रहे हो या गिरवी रख रहें हों और अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हो ,वहां आगे चल कर खतरा हो सकता है। ऐसी कंपनियों से भी बचें- भविष्य में जिनके बिजनेस मॉडल को खतरा हो सकता है या भविष्य में जिनके उत्पादों की खपत कम होने वाली है वैसी कंपनियों से भी दूर रहें।

3. सस्ते शेयर का चुनाव -

शेयर मार्केट में निवेश करते समय कुछ लोग सोचते हैं कि मंहगे शेयर का चुनाव करने की जगह सस्ते शेयर का चुनाव क्यों न किया जाए? जब कोई शेयर 4या 5 रूपये में मिल रहा है 500 वाला शेयर क्यों चुनें। इस गलती से बचना होगा यह सोचना होगा उस कंपनी में जरूर ऐसा कुछ रहा है, जिसके कारण उसके शेयर दाम इतने कम हो गए हैं।

यह बात हमेशा याद रखें कि आज आप जिसे 5 रूपये में खरीद रहे हैं उसका नाम आगे चलकर 10 पैसे भी हो सकता है इस तरह से आप की लगाई हुई पूरी रकम समाप्त हो सकती है। कहने का तात्पर्य है - शेयर का रेट मायने नहीं रखता कंपनी का परफारमेंस शेयर चुनने की वजह होती है।
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4. टिप्स लेना -

शेयर मार्केट में टिप्स लेना भी खतरे को आमंत्रित करना हो सकता है क्योंकि आपको नहीं पता कि जानकारी देने वाला कितना ट्रस्टेड है, उसका मकसद क्या है। आजकल टिप्स देने वाली कंपनियों की बाढ़ सी आ गई प्रतिदिन ऐसे कई फोन मेरे पास भी आते है, ये लोग मंथली फीस लेकर शेयर खरीदने के एडवाइस देते हैं।

इसके अलावा टीवी न्यूज़ चैनल, वेबसाइट्स भी शेयर खरीदने के टिप्स देती है इसमें उनका निहित स्वार्थ भी छिपा हो सकता है। खेल कहीं पर भी हो सकता है। अगर टिप्स देने वाले किसी शेयर का भविष्य इतनी अच्छी तरह जानते, तो फिर उसमें खुद ही इन्वेस्ट करके पैसे क्यों नहीं कमा लेते।


5. दलाल के जाल में फंसना -

कुछ नई कंपनी अपने शेयर का दाम बढ़ाने के लिए दलालों का सहारा लेती है. यह दलाल ऐसे ही वेबसाइट्स और कॉल सेंटर से जुड़कर उस कंपनी के बारे में अच्छी-अच्छी न्यूज़ प्रसारित करवाते हैं।पहले खुद कुछ शेयर खरीदते हैं,फिर उन shares का आपस में transaction करते हैं, इससे वॉल्यूम बढ़ने पर लोगों का ध्यान कंपनी की तरफ जाता है।

बाद में लोगों का involvement होने से दाम बढ़ने लगते हैं, जब उन्हें लगता है शेयर का दाम पर्याप्त बढ़ गया है तो अपने पास रखें shares को बेंच कर मुनाफा कमा लेते हैं। (वैसे यह गतिविधि अवैधानिक होती है और सेबी इस पर नज़र रखता है). शेयर्स की तेज बिकवाली से सर्किट लगने के कारण आम निवेशक अपने शेयर बेंच भी नहीं पाता। या फिर वो सोचने लगता है कि शेयर का दाम इतना गिरने के बाद अब बेचने से क्या फायदा। इस तरह ट्रैप में फंसा हुआ निवेशक निकल भी नही पाता और उसकी लगभग सारी पूंजी डूब जाती है।

6. एक ही सेक्टर में निवेश करना --

एक तरह के कंपनी के बहुत सारे शेयर एक ही बार न खरीद ले। आपको कई अलग-अलग सेक्टर के कंपनियों के शेयर को थोड़ा-थोड़ा करके खरीदना चाहिए। आप अपने शेयर के लिमिट को साप्ताहिक या मासिक आधार पर बढ़ा सकते है।

एक ही तरह के business में अपने सारे पैसे न लगाये। थोड़ा-थोड़ा करके आपको विभिन्न सेक्टर की कंपनियों में अपने पैसे को लगाना चाहिये। यदि आप एक ही कंपनी में invest करेंगे तो हो सकता है की आपको कभी ज्यादा प्रॉफिट हो जाये, पर यदि कम्पनी में प्रॉब्लम हुई तो शेयर का भाव तेजी से गिरेगाऐसे समय में निवेशक हैरान परेशान होता है, पर शेयर बेचकर निकल नहीं पाता और और अंत में लम्बा लॉस बुक करना पड़ता है।

7. इमोशनल होने बचें --



शेयर मार्किट में नुकसान होने का डर और शेयर के भाव बढ़ने के बाद उसे टारगेट प्राइस के बाद भी बढ़ने देने का लालच आपको जोखिम में डाल सकता है। अतः अपने सूझ-बुझ से काम ले, लालच और डर से बिलकुल दूर रहें।यदि शेयर का प्राइस आपके स्टॉपलॉस पास पहुंचे तो उस शेयर को बेच कर अपने बचे हुए पैसे को सेफ करें। शेयर की खरीद-बिक्री के दौरान आपको बिल्कुल time waste नही करना चाहिये।


          अगर ज्यादा सोच विचार करेंगे तो शेयर मार्केट में काम  नहीं कर  पाएंगे। अगर आपकी स्टडी कहती है की इस शेयर को ख़रीदना या बेचना है तो उसे तुरंत फॉलो करें। क्योकि अभी जो शेयर 200 रूपये का दिख रहा है थोड़ी देर में वो 195 या 205 का हो सकता है। यहां जो भी loss या profit बने उसमे संतोष करना होता है। अगर आपने किसी 200 रूपये वाले शेयर को 220 में बेचा,फिर उसके बाद वो शेयर 250  भी हो जाए तो mind में टेंशन नहीं लेना, की मैंने उसे 220  में क्यों बेचा। क्योकि वो शेयर 220 से वापस घूम कर 190 भी हो सकता था। 



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8. मार्केट के पीक पर निवेश --

शेयर मार्केट एक चक्र में काम करता है यहां ऊपर और नीचे जाने का सिलसिला लगातार चलता रहता है अगर आपने मार्केट के low में किसी शेयर को पकड़ा है तब तो आपकी बल्ले बल्ले हो सकती है, वैसे जब बाजार गिरता है तो कोई नहीं जानता कि ये कहाँ तक नीचे जायेगा।बॉटम फिशिंग एक्सपर्ट के बस की बात भी नहीं है परंतु यदि आपने मार्केट के peak पर शेयर खरीदा है, तो वहां से बाजार के गिरने की संभावना बहुत ज्यादा रहेगी और आपका शेयर भी तेजी से नीचे जा सकता है।
जैसे यदि किसी ने जनवरी 2008 में 6100 निफ़्टी के समय निवेश किया उसके बाद मार्केट क्रैश हुआ और लगभग 11 महीनों में निफ़्टी के 2700 हो जाने पर उसकी पूँजी लगभग 40 प्रतिशत रह गयी। (यह औसत आंकड़ा होता है किसी शेयर में कम और किसी में ज्यादा गिरवाट आती है ). यह बात अलग है कि कुछ वर्षों में मार्केट ने फिर से 6100 का आंकड़ा छुआ और उसके बाद आगे भी निकल गया। परंतु हर निवेशक में इतना दम नहीं होता की अपनी रकम का 60 - 70% टूट जाने के बाद भी वह मार्केट में बना रहे।
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9. शेयर को लेकर भूल जाना --

अगर आप सोचते है की हमने अच्छे शेयर चुन के निवेश किया है अब 4 या 5 साल बाद इनके बारे सोचेंगे तो यह आपकी बड़ी भूल है। समय समय पोर्टफोलियो मैनेजमेंट पर ध्यान नहीं दिया गया तो कितने भी अच्छे ढंग से shares का चुनाव किया जाए भविष्य में उनसे फायदा होने की गारंटी नहीं होगी। आगे चलकर कौनसा सेक्टर लम्बी मंदीं में फंस रहा है, किस कंपनी के मैनेजमेंट में क्या बदलाव होता है, कोई नया घोटाला या कांड सामने आता है तो ऐसी घटनाओं से कंपनी के परफारमेंस में बहुत बुरा असर पड़ता है. जिसका असर उसके शेयर प्राइस में दिखाई पड़ता है।

10. परफॉरमेंस चेक न करना -

अपने पोर्टफोलियो पर नजर बनाए रखें यदि उसमें शामिल किसी कंपनी में ऐसी कोई घटना दिखाई पड़े तो उसका विश्लेषण करें। निकलने लायक लगे तो समय रहते निकलने में ही ठीक होता है। अगर शेयर लेकर भूल जाने वाली नीति अपनाई गई तो शेयर मार्केट से लॉस हो सकता है।


सारांश यह है कि समझे बिना निवेश, घाटे सौदा हो सकता है परन्तु सोच समझ कर निवेश करने से ये बहुत फायदेमंद होता है। सही निवेश करके अनेक लोग करोड़पति बने हैं। लम्बे समय में इससे मिलने वाला लाभ बैंक FD से मिलने वाले ब्याज से कहीं अधिक होता है।

आशा है "Share market me loss kaise hota hai" यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी। शेयर बाजार की और भी उपयोगी जानकारी पाने के लिए इस वेबसाइट पर विजिट करते रहें और email subscribe करें। अपने सवाल और सुझाव हमें कमेंट द्वारा बताएं।

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