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Monday, October 21, 2019

Share market is gambling or not- क्या शेयर बाज़ार जुआ है

Share market is gambling or not-क्या शेयर बाज़ार जुआ है 

क्या स्टॉक मार्केट जुआ है? क्या लोगों को शेयर बाजार में निवेश को जुआ का एक रूप मानना ​​चाहिए? आइये इस लेख में इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढते हैं।  हमारे देश में अभी भी लोगों को शेयरों में निवेश करना पसंद नहीं है। अधिकतर लोग इसे संदेह की नजर से देखते हैं और इसकी तुलना जुए (gambling) से करते हैं। परन्तु शेयर बाज़ार में निवेश भी गोल्ड या प्रॉपर्टी की तरह ही है जो मार्केट की डिमांड सप्लाई, अर्थव्यवस्था की स्थिति के साथ चक्रीय (cyclic) प्रभाव जैसे कारकों से प्रभावित होता है। 

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    कई लोग शेयर्स में निवेश करने पर फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह गारंटी न होने के कारण इसे नापसंद करते हैं। भारत में 2% से भी कम लोग शेयर्स में निवेश करते हैं जबकि अमेरिका में आधी आबादी शेयर्स में निवेश करती है। इसका कारण हमारे देश में शेयर मार्केट की शिक्षा का अभाव और इसकी सही जानकारी न होना भी है।  शेयरों में निवेश की कोई समझ न होने से लोग यहां गलत शेयरों में निवेश कर देते हैं जो उनके लिए नुकसानदेह साबित होता है या फिर बिना अनुभव के शेयर बाज़ार में बड़ी रकम लगाकर ट्रेडिंग शुरू कर देते हैं जिसमें इन्हें लॉस होता है। 

    ऐसे लोगों की असफलता की कहानियां सुनकर एक मिथक बनता है कि स्टॉक मार्केट एक जुआ है। जबकि शेयरों में निवेश की जुए से तुलना गलत है, यह पैसे को बढ़ाने का बिल्कुल वैध तरीका है।  शेयर में निवेश एक सच्चाई है और इसमें बहुत पैसा बना सकते हैं, लेकिन जुए में खेलने वाले का भला नहीं होता है। निवेश की जगह शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग एक व्यवसाय है और हर व्यवसाय की तरह इसमें भी अनुभव और पूरी जानकारी होने के बाद ही सफल हुआ जा सकता है। बहुत से लोगों का यह फुल टाइम जॉब है।  


क्यों स्टॉक में निवेश जुआ नहीं है -


1. निवेशक कंपनी में हिस्सेदार बनते हैं - 

 जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो उस कंपनी में स्वामित्व खरीद रहे होते हैं। भले ही वह कंपनी का बहुत छोटा हिस्सा होता है। किसी कंपनी के शेयरों को खरीदना उसकी परिसंपत्तियों के साथ उसके ऋणों पर दावा करने के बराबर है। साथ ही जिस कंपनी के शेयर आप खरीदते हैं, उसके मुनाफे का एक छोटा सा हिस्सा आप भी प्राप्त करते हैं। अक्सर निवेशक किसी कंपनी के शेयरों को केवल ट्रेडिंग स्टॉक के रूप में देखते हैं और भूल जाते हैं कि वे अब कंपनी के हिस्सेदार भी हैं। जबकि अपने पैसों को जुआ में लगाने पर किसी कम्पनी में हिस्सेदारी या स्वामित्व नहीं मिलता। 
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2. निवेश रणनीतियों और जुआ में अंतर -


निवेश में, प्रॉफिट और लॉस बुक करने वालों की अलग-अलग डिग्री हो सकती है। क्योंकि निवेशक, किसी जुआ गेम के पूरी तरह से खत्म होने के इंतजार के बजाय शेयर खरीदते और बेचते रहते हैं। इसलिए निवेश में आंशिक लाभ और आंशिक हानि करने वाले हो सकते हैं। 

     जबकि जुआ खेलने वाले के साथ विजेता और हारने वाला होना चाहिए। जुआ हारने वाले से पैसे लेता है और हर बार विजेता को वही पैसा देता है। यहां टोटल लॉस या प्रॉफिट की स्थिति होती है। जुए में धन केवल एक जुआरी से दूसरे में स्थानांतरित किया जाता है। जबकि निवेश से अर्थव्यवस्था की समग्र संपत्ति में वृद्धि होती है। 

     किसी कंपनी में निवेश होने पर वह अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाती हैं और नए उत्पादों का विकास करती हैं। जिससे व्यवसाय के नए अवसर बढ़ने के साथ लोगों का जीवन बेहतर बनता है। कंपनियां मुनाफा कमाती हैं और उन लाभों को लाभांश के माध्यम से निवेशकों को साझा करती हैं। निवेश, निवेशकों के लिए बहुत लंबे समय तक धन बनाता है और यह जुआ के शून्य-राशि के खेल के समान नहीं है।


3. निवेशक अपने लॉस को सीमित कर सकता है -

निवेशक अपने नुकसान को सीमित कर सकते हैं। निवेशक जब चाहे अपने लॉस मेकिंग शेयर को बेचकर बाहर निकल सकता है। स्टॉक निवेशक अपने नुकसान को सीमित करने के लिए अपने ब्रोकर के माध्यम से या ऑनलाइन प्लेटफार्म पर स्टॉप लॉस के नाम से एक ट्रेडिंग ऑर्डर लगा सकता है। 

      यदि कोई निवेशक चाहता है कि उसकी 95% पूँजी सुरक्षित रहे तो शेयर का प्राइस नीचे गिरने की दशा में वह 5% पर स्टॉपलॉस लगा सकता है। जिससे उसकी 95% रकम सुरक्षित हो सकेगी और वह इसे किसी दूसरे शेयर खरीदने में लगा सकेगा। इस प्रकार एक निवेशक अपने नकारात्मक जोखिम को सीमित कर सकता है। परन्तु जुआ में एक बार लगा दिए गए दाँव के साथ यह सुविधा नहीं होती। 
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4. निवेश और जुआ में टाइम पीरियड -

टाइम पीरियड, निवेश और जुए के बीच एक और अंतर है। यदि आप निवेश न करके इंट्राडे ट्रेडिंग या स्विंग ट्रेडिंग भी करते हैं, तो भी वे जुए से अलग हैं। जुआ एक समय-आधारित घटना है जिसमें एक निर्धारित समय या तिथि होती है, जबकि निवेश लम्बे समय तक जारी रह सकता है।


   कई कंपनियां समय समय पर लाभांश देती हैं, जिसका लाभ उसके निवेशकों को प्राप्त होता है। लम्बे समय के निवेशक अपने शेयर के  खरीदे गए मूल्य से अधिक रकम, लाभांश के जरिये प्राप्त कर सकते हैं।यह एक निवेशक के लिए पुुरुस्कार की तरह होता है। जुए के साथ ऐसा कुछ नहीं होता। वहां खिलाडी या तो जीतता है या उस पैसे को खो देता है जिसे उसने दाँव पर लगाया था। यहां कोई मध्य क्षेत्र नही होता है।


5. निवेश जानकारी पर आधारित होता है -


निवेश करना जुए से पूरी तरह से अलग है। इसके लिए कम्पनी के फंडामेंटल देखकर आप कंपनी का चुनाव करते हैं या ऑनलाइन फ़ोरम, स्टॉक ऐनालिस्ट्स की रिपोर्ट अथवा टेक्निकल एनालिसिस के माध्यम से कंपनियों में निवेश करते हैं। निवेशक को यह सुविधा होती है कि वह पूरी   जानकारी लेकर किसी स्टॉक में निवेश करे। जबकि निवेश के विपरीत, जुआ खेलते समय केवल सीमित जानकारी होती है। 
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निवेश और जुआ में समानताएं -


1. जोखिम (Risk) -

निवेश से पहले नुकसान का गणित जरूर समझ लें, निवेश और जुआ दोनों में जोखिम शामिल है। यही नहीं अन्य निवेश जैसे प्रापर्टी, सोना, कमोडिटी सभी के साथ जोखिम जुड़ा हुआ है।  निवेश का नियम है कि पहले जोखिम को अच्छे से समझ लें। लोग अधिक और जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में जोखिम को भूल जाते हैं और दूसरों की सलाह पर अपना पूरा पैसा लगा देते हैं।  शेयर बाजार में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है इसलिए अगर आप में जोखिम उठाने की क्षमता है तो ही निवेश करें।   


    निवेशक और जुआरी दोनों को पता होना चाहिए कि वे कितना जोखिम सहन कर सकते हैं। प्रत्येक निवेशक और जुआरी के पास एक निश्चित जोखिम सहिष्णुता होती है, उन्हें पता होना चाहिए कि कब रुकना या बेचना है। लॉस होने के समय धैर्य पूर्वक अनुशासन का पालन करते हुए रुकने या बेचकर बाहर निकलने में ही समझदारी होती है अन्यथा निवेश हो या जुआ दोनों ही आपको आर्थिक रूप से कमजोर बना सकते हैं।


2. हार के बाद संतुलन खोने का रिस्क -

जुऐ में हारा हुआ खिलाड़ी अपना विवेक खोने  के बाद लॉस कवर करने के चक्कर में बड़ी रकम लगाकर उलटे सीधे दांव खेलने लगता है उसी प्रकार की स्थिति शेयर बाज़ार में लॉस होने पर कुछ निवेशकों की भी होती है।  ये लोग शेयर का रेट गिरने पर एवरेज के चक्कर में बड़ी क्वांटिटी buy करना शुरू कर देते हैं और ऐसा तब तक करते हैं जब तक उनका पूरा कैपिटल साफ़ नहीं हो जाता। 

      ऐसे लोग यह समझने का प्रयास भी नहीं करते कि गिरावट का कारण क्या है? कंपनी में कोई बड़ी समस्या तो नहीं आ गई है? बिना इन बातों विचार किये गिरते शेयर को खरीदते जाना गिरते हुए चाकू को पकड़ने जैसा घातक होता है और यह भी एक किस्म का जुआ बन जाता है। 


3. ऑप्शन में ट्रेडिंग और जुआ -

शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट, जुआ नहीं है परन्तु शेयर मार्केट में ट्रेडिंग विशेषकर वीकली ऑप्शंस में ट्रेडिंग से जुआ खेलने जैसी फील आती है।शेयर मार्केट वीकली एक्सपायरी के दिन ऑप्शन buy करना गैंबलिंग जैसा ही है। एक्सपायरी के दिन आउट ऑफ़ मनी कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू तेजी से घटती है। अगर कोई बड़ा मूव आपके डायरेक्शन में आता है तो बात अलग है अन्यथा खरीदे गए ऑप्शन का मूल्य 5 पैसे होने में देर नहीं लगती है। शेयर मार्केट में इस तरह ऑप्शन ट्रेडिंग करने या गैंबलिंग करने में ज्यादा अंतर नहीं रहता। 


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conclusion -


शेयर बाजार में निवेश करना जुआ नहीं है, और किसी भी नए निवेशक को इसे जुआ समझकर डरने की जरूरत नहीं है। यदि आपका खरीदा हुआ शेयर अच्छा परफॉर्म नहीं करता है तो अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। कई लोग खराब शेयर को उसके बढ़ने की उम्मीद लगाकर रोके रखते हैं, उन्हें शेयरों में निवेश से भारी नुकसान उठाना पड़ता है। 

   किसी एक शेयर में निवेश करने की जगह 8-10 शेयरों का डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाना अच्छा है।  इनमें फ़ण्डामेंटली स्ट्रांग वे शेयर होने चाहिए जिनमें भविष्य में बढ़ने की क्षमता दिखती हो। यदि कोई कम्पनी अच्छा परफॉर्म न कर पा रही हो तो उसके शेयर बेचकर निकल जाना चाहिए। तभी आप शेयर बाज़ार में निवेश से बढ़िया रिटर्न की अपेक्षा कर सकते हैं। 

      आशा है ये आर्टिकल "Share market is gambling or not- क्या शेयर बाज़ार जुआ है" आपको उपयोगी लगा होगा। इसे अपने मित्रों तक शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल और सुझाव कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। शेयर मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग संबंधी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें। 

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