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Tuesday, August 18, 2020

Triphala Churna Health Benefits-त्रिफला के लाभ और सेवन विधि

Triphala churna Health Benefits-त्रिफला के लाभ और सेवन विधि 

त्रिफला एक प्रसिद्ध और अत्यंत उपयोगी आयुर्वेदिक फार्मूला है। आयुर्वेद की महान देन त्रिफला से हमारे देश का आम व्यक्ति भली-भांति परिचित है।त्रिफला शब्द का शाब्दिक अर्थ है "तीन फल" जिसे आंवला, बहेडा और हरड़ के बीज निकाल कर बनाया जाता है। इसमें 1 भाग हरड, 2 भाग बहेड़ा, 3 भाग आंवला होता है अर्थात इनका अनुपात 1:2:3 मात्रा में रखा जाता है।

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    त्रिफला का सेवन त्रिदोष नाशक है और हमारे पूरे शरीर को संरक्षण प्रदान करता है। यदि हम संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करते हैं तो हमें हृदयरोग, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। 

    यह विभिन्न प्रकार के प्रमेह, त्वचा रोग, विषम ज्वर व सूजन को नष्ट करता है। इसका प्रयोग अस्थि, केश  दाँत को मजबूत बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरोग, बलवान व फुर्तीला बनाता है। 

 पाचन संस्थान के रोग दूर करने के लिए त्रिफला का सेवन प्रायः किया जाता है। पर कम लोग जानते है कि त्रिफला चूर्ण के नियमित सेवन से अपने कमजोर शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है, आयुर्वेद में इसे रसायन माना जाता है। आइये जानते हैं इस चमत्कारिक औषधि के नियमित सेवन से होने वाले स्वस्थ्य लाभों के बारे में।


त्रिफला के स्वास्थ्य-संबंधी लाभ (Triphala Health Benefits)


1.पेट के लिए उपयोगी -


त्रिफला पाचन संबंधी समस्याओं को मिटाकर, भूख को बढ़ाने में सहायता करती है। त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते हैं। 


  रात में सोने  से पहले 5 ग्राम (एक चम्मच) त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होती है। कब्ज मिटाने के अन्य प्रयोग में त्रिफला के साथ 2 चम्मच ईसबगोल की भूसी  मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से ले सकते हैं।

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2. मोटापा कम करने में -


त्रिफला की तीनों जड़ी बूटियाँ आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं। यह शरीर में वसा के अतिरिक्त जमाव को कम करती हैं तथा पाचन को ठीक करके शरीर में पोषक तत्वों के सम्मिलन को बेहतर बनाती हैं। मोटापा कम करने के लिए त्रिफला चूर्ण को पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।


3. आँखों के लिए फायदेमंद -


इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। गाय का घी व शहद के मिश्रण (एक चम्मच त्रिफला चूर्ण, गाय का घी 10 ग्राम व शहद 5 ग्राम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन आंखों के लिए वरदान स्वरूप है।


 

  संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमित प्रयोग करने से मोतियाबिंद, कांचबिंदु या अन्य दृष्टिदोष होने की संभावना नहीं होती और बुढ़ापे तक दृष्टि ठीक बनी रहती है।


  नेत्र-प्रक्षालन करने के लिए एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें। सुबह कपड़े से छानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें स्वच्छ व दृष्टि उत्तम  होती है और आंखों की जलन, लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।

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4.दांतों और मुँह संबंधी समस्याओं में -


एक चम्मच त्रिफला को एक गिलास पानी में दो- तीन घंटे के लिए भिगो दे, इस पानी से कुल्ला करें। कभी कभार त्रिफला चूर्ण से मंजन भी करें इससे मुँह के छाले ठीक होंगे और मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी।


 टॉन्सिल्स की समस्या दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण के पानी से बार-बार गरारे करना उपयोगी रहता है।


5. चर्मरोगों में -


इसका सेवन करने से चेहरे पर कांती आ जाती है और त्वचा के रंग और टोन में सुधार आता है  त्वचा की सफाई करने के साथ दाद, खाज, फोड़े-फुंसी आदि को दूर करने में त्रिफला उपयोगी है।


  त्रिफला की राख शहद में मिलाकर गरमी से हुए त्वचा के चकतों पर लगाने से राहत मिलती है। त्रिफला के काढ़े से घाव धोने पर घाव जल्दी भर जाता है और एलोपैथिक- एंटिसेप्टिक की आवश्यकता नहीं रहती। 

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6. शारीरिक कमजोरी मिटाये -


त्रिफला दुर्बलता का नाश करता है और स्मृति को बढाता है।  लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर सेवन करने से यह सप्त धातु वर्धक होता है।


 त्रिफला-रसायन-कल्प, त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। इससे नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं। डेढ़ माह तक इस रसायन का सेवन करने से स्मृति, बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है।


7. त्रिफला चूर्ण के अन्य फायदे -


A. त्रिफला का सेवन मूत्र-संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में बहुत लाभकारी है। प्रमेह आदि में शहद के साथ त्रिफला लेने से अत्यंत लाभ होता है। इसके सेवन से रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है।


B. जीर्ण ज्वर में त्रिफला फायदेमंद है। 5 ग्राम त्रिफला पानी के साथ लेने से जीर्ण ज्वर के रोग ठीक होते है।


C. 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गोमूत्र या शहद के साथ एक माह तक लेने से पीलिया  रोग मिट जाता है।


D. त्रिफला, तिल का तेल और शहद समान मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण की  10 ग्राम मात्रा प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट, मासिक धर्म और दमे की तकलीफे दूर होती है।  


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त्रिफला चूर्ण सेवन विधि - 


इसकी 4 ग्राम मात्रा दोपहर को भोजन के बाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं अथवा सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के एक घंटे बाद तक कुछ ना लें।  सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम तक त्रिफला चूर्ण लेना चाहिए।


  सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को इसका पानी छानकर पी लें। फिर इसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें व सुबह इस पानी का इस्तेमाल अपनी आँखें धोने में करें।  

त्रिफला चूर्ण के नियमित इस्तेमाल से कायाकल्प किया जा सकता है। वर्ष भर इसका प्रयोग करने के लिए इसे अलग अलग ऋतुओं के अनुसार इसमें   विभिन्न वस्तुएं मिलाकर लेने की विधि आयुर्वेद ग्रंथों में बताई गई है। 


ऋतु के अनुसार त्रिफला चूर्ण  का सेवन -


1. ग्रीष्म ऋतु  - 14 मई से 13 जुलाई तक त्रिफला में गुड़ की 1/4 भाग मात्रा मिलाकर सेवन करें। 


2.  वर्षा ऋतु - 14 जुलाई से 13 सितम्बर तक इस त्रिदोषनाशक चूर्ण के साथ सैंधा नमक 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें। 


3. शरद ऋतु - 14 सितम्बर से 13 नवम्बर तक त्रिफला के साथ देशी खांड 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें। 


4.  हेमंत ऋतु - 14 नवम्बर से 13 जनवरी के बीच त्रिफला के साथ सौंठ का चूर्ण 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें। 


5. शिशिर ऋतु - 14 जनवरी से 13 मार्च के बीच छोटी पीपल का चूर्ण 1/4 भाग मात्रा में मिलाकर सेवन करें। 


6. बसंत ऋतु - 14 मार्च से 13 मई के दौरान त्रिफला चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें।  शहद उतना मिलाएं जितना मिलाने से अवलेह बन जाये।


सावधानियां -

कभी-कभी त्रिफला के सेवन से लूज मोशन शुरू हो जाता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर के मरीज के लिए स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोग पेट साफ करने के लिए नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करते हैं। ऐसे में उन्हें इसकी लत लग जाती है और त्रिफला न मिलने पर उन्हें बेचैनी व अनिद्रा की परेशानी शुरू हो जाती है। इसकी हेवी डोज लेने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखी जाती है। 


 इसके अलावा चिकित्सक गर्भवती महिलाओं को त्रिफला का सेवन नहीं करने की सलाह देते हैं। गर्भावस्था के दौरान त्रिफला के सेवन से महिलाओं को घबराहट, पेचिश आदि समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए सावधानी के तौर पर अपनी उम्र, रोग व स्थिति का विचार करते हुए इसकी मात्रा व इसके साथ लिए जाने वाले द्रव्य की जानकारी हेतु अपने आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लें। 

 

   आशा है ये आर्टिकल "Triphala Churna Health Benefits-त्रिफला के लाभ और सेवन विधि " आपको उपयोगी लगा होगा। इसे अपने मित्रों तक शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल और सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें। 

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