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Thursday, September 10, 2020

Fake Call Frauds-बस एक कॉल और खाता साफ़

Fake Call Frauds-बस एक कॉल और खाता साफ़ 

वर्तमान डिजिटल अर्थव्यवस्था में, साइबर-अपराध सर्वव्यापी है और एक प्रमुख सुरक्षा मुद्दा बन गया है। साइबर-अपराधियोँ द्वारा अपने शिकार पर नये -नये हमले के तरीके और ठगी के मॉडल अपनाये जाते हैं। अपराधी अपने पीड़ितों को फंसाने के लिए अपनी तकनीकों में सुधार करते रहें हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला कौन है,  उनका एकमात्र लक्ष्य होता है धन प्राप्त करना। 

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   साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिस में कंप्यूटर या मोबाइल फोन और नेटवर्क का उपयोग शामिल है। साइबर अपराध भी कई प्रकार के है जसे कि स्पैम ईमेल, हैकिंग, फिशिंग, किसी कंप्यूटर में वायरस डालना, किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना आदि। अपनाया गया तरीका अपराधी की योजना पर निर्भर करता है। 


   नेट बैंकिंग और e-wallet के बढ़ते प्रयोग को देखकर अपराधियों ने इसके जरिये लोगों को ठगने का तरीका निकाल लिया है। अपराधी अक्सर अपने पीड़ितों के साथ फ़ोन कॉल का तरीका इस्तेमाल करते हैं, यह ठगी का एक प्रचलित रूप है। अब वे कहीं भी बैठकर केवल एक फ़ोन कॉल जरिये लोगों के बैंक एकाउंट से रकम उड़ा रहे हैं।  इसमें विभिन्न तरीकों से फ्रॉड किये जाते हैं। कुछ तरीके इस प्रकार हैं -


कॉल के जरिये ठगी के तरीके (Fake Call Frauds) 


 1. फर्जी बैंक कॉल- 

कई धोखाधड़ी योजनाओं में फोन नंबर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें शिकार को एक फोन कॉल की जाती है और कहा जाता है कि आधार से लिंक न होने के कारण उसका ATM कार्ड बंद हो गया है। ठग पूरे आत्त्मविश्वास से बात करता है और उसके बात करने का ढंग ऐसा होता है कि व्यक्ति को लगता है कि उसके बैंक से कॉल की गई है। 


  इस तरीके में सारी जानकारी शिकार व्यक्ति से ही निकलवाई जाती है, जो उसी के खिलाफ इस्तेमाल की जाती है। जैसे कहा जाता है कि आप अपना नाम और खाता नंबर बताएं। फिर आपसे आपके एटीएम कार्ड के आगे और पीछे छपे नंबर पूछ लिए जाते हैं। शिकार से कहा जाता है क़ि हम अपने रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी को वेरीफाई कर रहे हैं और यदि उसने यह जानकारी नहीं दी तो उसका खाता बन्‍द कर दिया जायेगा।  

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   एटीएम कार्ड ब्लॉक किये जाने या खाता बन्‍द कर दिए जाने की बात सुनकर  व्यक्ति घबरा जाता है और ठग द्वारा पूछी गई जानकारी देने लगता है। उसे विश्वास में लेने के लिए ठग कहता है कि आप अपना एटीएम पासवर्ड कभी किसी को मत बताना। 


    इतनी देर में ठग का साथी शिकार द्वारा दी गई जानकारी के जरिये उसके पैसे अपने किसी खाते में ट्रांसफर की तैयारी कर चुका होता है और अब उसे शिकार के मोबाइल में आये OTP (one time passward) की जरूरत होती है। इसके लिए ठग कहता है कि आपका खाता और एटीएम तुरंत चालू किया जा रहा है, बस अपने मोबाइल में आये वेरीफिकेशन कोड (OTP नहीं कहा जाता) को देखकर बताएं। जैसे ही ये जानकारी ठग को दी जाती है, व्यक्ति का खाता साफ़ हो जाता है। 


    यह तरीका पिछले काफी समय से ठग अपनाते रहे हैं परन्तु अब OTP का महत्व लोग समझने लगे हैं इसलिए OTP नहीं बताना चाहते। इसका भी तोड़ ठगों के पास होता है। वे कहते हैं आप हमें कुछ मत बताइये, अगर आप अपना एटीएम कार्ड ब्लॉक होने से बचाना चाहते हैं तो आपके मोबाइल पर भेजे गए फॉर्म को फिल करें या भेजे गए लिंक को ओपन करके सूचना दें। यदि कोई ऐसा करता है तब भी अपने बैंक में जमा पैसे गंवा बैठता है।


    एक अन्य विधि में ठग कहता है कि बैंक आपसे कोई भी जानकारी नहीं लेना चाहता और न ही ये जानकारी आप किसी को देना। आपकी सुविधा के लिए बस आपको ये ऐप या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना है। हम आपको ये लिंक भेज रहे है,  इसे ओपन करके अपने फोन पर इनस्टॉल कर लीजिये बस आपका काम हो जायेगा। ऐसा करते ही उसका भेजा हुआ स्पाई सॉफ्टवेयर आपके फोन की सारी जानकारी अपराधी के पास पहुंचा देता है।   

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2. OLX पर सामान की बिक्री -


ठग किसी सामान या गाडी को बेचने का विज्ञापन OLX पर डालते हैं।सामान की कम कीमत देखकर बहुत से लोग उनसे सम्पर्क करते हैं। यहां पर ठग नकली आइडेंटिटी के जरिये अपना परिचय एक सैनिक के रूप में देता है। इससे व्यक्ति प्रभावित हो जाता है और एडवांस में कुछ रकम उसके बताये खाते में डालने को तैयार हो जाता है। 


    जैसे ही कुछ रकम ठग के खाते में ट्रांसफर की जाती है वह नए नए बहाने बनाकर अपने शिकार से और रकम अपने खाते में डालने को कहता है। शिकार व्यक्ति इंकार नहीं कर पाता क्योंकि उसे अपनी पहले डाली गई रकम डूबने का डर होता है। जब तक उसे यह बात समझ में आती है कि वह ठगा जा चुका है, तब तक वह एक बड़ी रकम ठग के खाते में डाल चुका होता है। बाद में वह नंबर भी बंद मिलता है। 


3. E -wallet के जरिये ठगी -


पिछले दिनों मनोज के पास एक फ़ोन आता है जिसमें कहा जाता है कि आपने ज्ञानचंदजी को 10 हजार रूपये उधार दिए थे, उन्होंने मुझे कहा है कि ये रूपये मैं आपको लौटा दूँ। क्योंकि मुझे ज्ञानचंद को 10 हजार रूपये देने हैं इसलिए मैं आपको गूगल पे के जरिये पैसे ट्रांसफर कर रहा हूँ। 


   मनोज सोचता है कि मुझे किसी ज्ञानचंद की याद नहीं है, जिसे मैंने रूपये उधार दिए हों। पर वह  फ़ोन पर कहता है कि ठीक है आप पैसे भेज दीजिये। थोड़ी देर में मनोज के खाते में 1000/- जमा होने का मैसेज आ जाता है। इसे देखकर मनोज खुश होकर कॉलर को 1000/- प्राप्त होने की सूचना देता है। 


    अब उस तरफ से कहा जाता है कि मैंने आपको 1 हजार भेज दिए हैं अब 9 हजार और भेज रहा हूँ। चूँकि ये बड़ी रकम है इसलिए आपसे accept या decline पूछा जायेगा। आपको accept करना है तभी आपके खाते में पैसा आ पायेगा, आप तो पढ़े लिखे हैं इसलिए ये बातें आप जानते ही होंगे। उत्साह से भरा मनोज हाँ में जवाब देता है। 


    अब मनोज को मैसेज मिलता है जिसमें लिखा होता है -ज्ञानचंद के बाकी पैसे 9000/-, accept या decline. जैसा कि बताया गया होता है मनोज accept को पुश करता है फिर अपना पिन भी डाल देता है।  अबकी बार मैसेज आता है मनोज के खाते से 9000/- ट्रांसफर हो गए........  अब मनोज को अपने ठगे जाने का पता चलता है और वह अपना माथा पीट लेता है। वास्तव में दूसरी बार में ठग ने मनोज को रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसे मनोज जल्दबाजी में समझ नहीं पाया और उस रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया।  

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4. लाटरी या इनाम की सूचना -


लाटरी या इनाम की सूचना पाकर किसी का भी खुश होना स्वाभाविक है, परन्तु यह अवसर सतर्क होने का होता है और ऐसे किसी फोन कॉल, मैसेज या ई-मेल को इग्नोर करने में ही भलाई होती है। अगर आप ऐसे किसी मैसेज पर प्रतिक्रिया करते हैं तो आपको टैक्स के रूप में एक रकम किसी खाते में ट्रांसफर करने को कहा जाता है...... एक बार पैसा डालने के बाद आपको बार बार कोई न कोई बहाना बनाकर और पैसा डालने को कहा जाता है। इस तरह कोई पैसा मिलना तो दूर, व्यक्ति अपने पास का पैसा भी गंवा बैठता है। 


    इसी से मिलता जुलता एक फार्मूला नाइजीरियाई ठग भी इस्तमाल करते हैं। ये लोग फेसबुक पर एक नकली प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को फंसाते हैं, जिसमें ये अपने आपको विदेश में निवासरत एक रिच बिजनेसमैन बताते हैं और किसी स्मार्ट आदमी की फोटो डिस्प्ले में लगाते हैं। 

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   यदि कोई महिला इन्हें विदेशी रिच और जेंटलमैन, स्मार्ट बिजनेसमैन समझकर चैटिंग और बातचीत शुरू करती है तो समझिये इनका आधा काम हो गया। फिर कुछ दिनों में ये ठग उस महिला को 50 लाख का एक गिफ्ट अपने द्वारा भेजे जाने की बात कहते हैं। महंगे गिफ्ट की बात सुनकर उस महिला को गिफ्ट आने का बेसब्री से इंतज़ार होता है।  


  तभी उसके पास एक फ़ोन आता है जिसमें बताया जाता है कि आपका गिफ्ट पहुंच गया है पर उसे छुड़ाने के लिए आपको कस्टम ड्यूटी अदा करनी पड़ेगी और इस एकाउंट नंबर पर आप 50 हजार रूपये डाल दीजिये, जिससे गिफ्ट जल्द से जल्द आपके पास भेजा जा सके।  कई बार महंगे गिफ्ट के लालच में बिना जांच पड़ताल के महिलाओं द्वारा रकम ठग के खाते में डाल दी जाती है। इस तरह धोखाधड़ी की जाती है। 


5. सिम स्वैपिंग के जरिये -


नोएडा की एक महिला के मोबाइल पर एक कॉल आता है जिसमें उसकी टेलीकॉम कंपनी का नाम लेकर कहा जाता है कि वह अपनी 3G  सर्विस को 4G में कन्वर्ट करवा लें अन्यथा उसका सिम बंद कर दिया जायेगा या 72 घंटों के अंदर उनका नेटवर्क बंद हो जायेगा। (वास्तव में यह एक फेक कॉल थी जो किसी ठग ने की थी।) 


    4G के चलन को देखते हुए उस महिला ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। कुछ समय बाद उनका नेटवर्क तो गायब हो जाता है परन्तु 1 सप्ताह के इंतज़ार के बाद भी 4G नेटवर्क उनके फोन पर नहीं आता। इससे उन्हें चिंता होती है और वे अपने बैंक जाकर पता करती हैं तो पता चलता है कि उनके खाते से साढ़े नौ लाख रूपये निकाल लिए गए हैं। ये सब कैसे हुआ जबकि उन्होंने न अपना OTP शेयर किया और न अपनी बैंक डिटेल किसी को दी। 

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    यह सब होता है सिम स्वैपिंग के जरिये। जिसमें कोई आपके सिम को कैंसल करवाकर आपके उसी नंबर और नाम से दूसरा सिम इशू करवा लेता है। इसके लिए आपके नाम से नया सिम इशू करवाने की रिक्वेस्ट डाली जाती है कि आपका फोन खो गया है। कस्टमर केयर प्रतिनिधियों से मिलीभगत करके झूठा वेरिफिकेशन करवाकर दूसरा सिम ले लिया जाता है। फिर आपका बैंक एकाउंट नंबर पता करके (इसे कई तरीकों से पता किया जा सकता है) मोबाइल और नेट बैंकिंग के जरिये खेल कर लिया जाता है। 


6. कस्टमर केयर के जरिये -


साइबर ठगों ने नामी कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर की जगह अपने नंबर अपलोड कर रखे हैं। लोग नेट पर असली नकली की पहचान नहीं कर पाते और फर्जी कस्टमर केयर नंबर में फोन करके फंस जाते हैं, क्योंकि यहां कॉल उठाने वाला कोई ठग होता है। 


  इन ठगों ने फर्जी लिंक बना रखे हैं और लोगों को 5 -10 रूपये का रिचार्ज करने को कहते हैं। रिचार्ज करते ही ठगों के पास संबंधित व्यक्ति के खाते की पूरी डिटेल और पासवर्ड की जानकारी पहुंच जाती है, जिससे वे उसके पैसे आसानी से किसी और खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं।


  रायपुर के एक इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी से इसी तरीके से 1 लाख 10 हजार रूपये की ठगी की गयी है। व्यवसायी को एक पार्सल महाराष्ट्र भेजना था। उन्होंने इंटरनेट से एक बड़ी कूरियर कम्पनी का नंबर ढूंढ कर निकाला और कॉल किया। उस तरफ से एक ठग ने कम्पनी का अफसर बन कर बात की और व्यवसायी के मैसेंजर पर एक लिंक भेजकर 5 रूपये रिचार्ज करने को कहा। 


  कारोबारी ने जैसे ही लिंक से रिचार्ज किया, ठग के पास खाते का ब्यौरा पहुंच गया। उसने पैसे निकलकर तुरंत दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। यह काम जामताड़ा (झारखंड) के ठग मोबिन का था, जिसे बाद में रायपुर पुलिस ने छापा मारकर पकड़ा।


   अब तो जामताड़ा गैंग ने अपने आपको मॉडिफाई करते हुए e SIM (वर्चुअल सिम) स्वैपिंग भी शुरू कर दी है। आपने जामताड़ा का नाम समाचारों में जरूर सुना होगा। फ़ोन कॉल के जरिये ठगी करने वाले अधिकतर कॉल वहीं से किये जाते हैं। आइये आपको कुछ बताते चलें, जामताड़ा के बारे में -


जामताड़ा (Jamtara)कहाँ है?


भारत का पिछड़ा राज्य समझे जाने वाले झारखंड का एक जिला है जामताड़ा। जिसमें लगभग 150 गाँव शामिल हैं। इन्हीं गांवों से संचालित होता है साइबर ठगी का धंधा, इस जगह को भारत में साइबर ठगी का गढ़ कहा जाता है।  प्रतिवर्ष भारत के अनेक राज्यों की पुलिस जामताड़ा में विशेषकर कर्मातार गांव में जो साइबर क्राइम को लीड करता है, दबिश देती है और गिरफ्तारी भी करती है परन्तु जामताड़ा से ठगी का काम बदस्तूर जारी है। 


   जामताड़ा के इन गाँवों में पहले अधिकतर मकान खपरैल वाले हुआ करते थे वहीं पिछले 8 -10  वर्षों में कच्चे मकानों की जगह लाखों करोड़ों की लागत के मकान बन गए हैं, जो सुविधा के मामले में शहरी बंगलों को भी मात करते हैं। इन घरों के सामने महंगी गाड़ियां खड़ी नज़र आती हैं। इससे कहा जा सकता है कि इनकी महीने की कमाई लाखों में है। 


  यह क्षेत्र पहले जहर खुरानी के अपराध के लिए जाना जाता था। यहां के लोग ट्रेन में यात्रियों को खाने या चाय में नशीली चीज़ मिलाकर देते थे फिर उनका सामान चोरी कर लेते थे। 


   पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल और नेट बैंकिंग का चलन बढ़ने पर यहां के युवकों ने अपना ध्यान साइबर ठगी पर केंद्रित किया। साइबर ठगी की बात सुनकर आप सोच रहे होंगे कि ये युवक बहुत पढ़े लिखे या सॉफ्टवेयर इंजीनियर होंगे, पर ऐसा बिलकुल नहीं है। इनमें से अधिकतर कॉलेज भी नहीं गए हैं और कुछ ने तो हाई स्कूल की शिक्षा भी पूरी नहीं की है। 


   इतने पिछड़े क्षेत्र लोगों ने आखिर साइबर क्राइम की शुरुवात कैसे की? दरअसल काम के सिलसिले में दिल्ली गए कुछ लड़कों का मोबाइल से परिचय हुआ फिर अपने गांव लौटकर इन लोगों ने दूसरों के मोबाइल बैलेंस अपने फोन में ट्रांसफर करने से इस काम की शुरुवात की। इसमें सफलता से इनका उत्साह बढ़ा और लोगों को बेवकूफ बनाने के अपने काम को एडवांस करते गए। 

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    यहां लोगों की सोच है -बच्चे को पढ़ाने से बेहतर है उसे साइबर ठगी में निपुण बना दो। पहले यहां के युवक सुबह एक जगह इकट्ठे होते, फिर छोटी टुकड़ियों  बंटकर अपने काम में लग जाते। कमजोर नेटवर्क मिलने पर कुछ युवक पेड़ों पर चढ़कर बैठते और वहीं से बैंक के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को फँसाते। 


 अब तो इनके पास 4 व्हीलर की सुविधा है, जिसमें घूमते हुए भी ये लोग अपने काम को अंजाम देते हैं। ऐसा करने से इनकी सही लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती, अपने घर पहुंचने के 5 km. पहले ये अपना मोबाइल बंद कर देते हैं। हर लड़का एक दिन में 50 से 150 लोगों को कॉल करता है और डेली कभी 1 -2 तो कभी 5 -10 लोगों को फंसाता है। 


   बातचीत में किसी को इनके बैंक प्रतिनिधि न होने का शक ना हो इसके लिए यहां बकायदा ट्रेनिंग क्लास चलती है। अगर कोई इनकी चालाकी भांपकर इनकी शिकायत पुलिस में करने को कहता है तब भी ये विचलित नहीं होते और फोन पर कह देते हैं - "जाओ शिकायत कर दो, पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती" 


 इन ठगों का कॉन्फिडेंस इतना है कि इन्होंने बॉलीवुड के अभिनेता, संगीतकार, फिल्म निर्देशकों से लेकर राजनेताओं, केंद्रीय मंत्री, सरकारी अधिकारी से लेकर पुलिस व सेना के लोगों को भी नहीं छोड़ा है। आम लोगों की बात करें तो उनकी संख्या लाखों में है जिनको इन्होंने ठगा है। 


  इस धोखाधड़ी के शिकार लोगों में अमिताभ बच्चन जिन्हें 5 लाख रूपये का चूना लगाया गया, एक केंद्रीय मंत्री जिन्हेँ सैलरी एकाउंट अपडेट करने के नाम डिटेल मांगे गए और किश्तों में करीब 2 लाख रूपये निकाल लिए गए जिसकी रिपोर्ट पार्लिआमेंट्री स्ट्रीट थाना, दिल्ली में लिखाई गयी, केरल के एक MP जिनकी बैंक डिटेल लेकर साढ़े तीन लाख रूपये निकाल लिए गए, ऐसे लोगों का नाम भी शामिल है। 


    यहां एक ख़ास बात और है भले ही जामताड़ा के 1000 से अधिक लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया हो परन्तु किसी बिरले केस को छोड़कर पैसों की रिकवरी कभी नहीं हो पाई है। ये लोग ऐसे लोगों के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते हैं जिनकी या तो मृत्यु हो गई है या जो बहुत वृद्ध है।


   ये लोग ठगी से प्राप्त रकम का 20% खाताधारक को देते हैं, इस लालच में पड़कर लोग इन्हें अपने खाते का उपयोग करने देते हैं। नए बैंक एकाउंट खुलवाने में भी ये लोग माहिर होते हैं। इसके लिए ये लोग किसी गरीब आदमी को दस हजार रूपये तक देने का लालच देकर उसका बैंक एकाउंट खुलवाते हैं और उसे खुद ऑपरेट करते हैं। 


  इस प्रकार साइबर क्राइम से बचने का सबसे अच्छा तरीका सतर्क रहते हुए अपना बचाव खुद करने का है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है -


फ्रॉड से बचने के लिए सावधानियां -


1. बैंक या उनके कोई भी प्रतिनिधि अपने ग्राहकों को कभी भी ईमेल / एसएमएस नहीं भेजते हैं जिनमें गोपनीय जानकारी मांगी गयी हो और न ही फोन पर उन्हें व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड या वन टाइम पासवर्ड (OTP) मांगते हैं।


   इस तरह का कोई भी ई-मेल / एसएमएस या फोन कॉल इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से ग्राहक के खाते से धोखाधड़ी से पैसे निकालने का एक प्रयास है। कभी भी ऐसे ईमेल / एसएमएस या फोन कॉल का जवाब न दें।


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2. कभी भी ऐसे ईमेल / एम्बेडेड लिंक / कॉल का जवाब न दें, जो आपको उपयोगकर्ता आईडी / पासवर्ड / डेबिट कार्ड नंबर / पिन / सीवीवी आदि को अपडेट या सत्यापित करने के लिए कहें,  ऐसे ईमेल / एसएमएस या फोन कॉल के बारे में अपने बैंक को सूचित करें। यदि आपने गलती से अपने क्रेडेंशियल्स का खुलासा कर दिया है तो तुरंत अपने पासवर्ड बदलें।


3. किसी पेज पर कोई व्यक्तिगत या गोपनीय जानकारी प्रदान न करें। ऐसा फॉर्म पॉप-अप विंडो के रूप में भी आ सकता है। सोशल मीडिया पर आने वाले लिंक जिनमें 1 साल के लिए मुफ्त डेटा देने या फ्री DTH कनेक्शन देने जैसी बात कही जाती है, उन्हें ओपन करके अपनी गोपनीय जानकारी देने से बचें। किसी प्रसिद्ध रेस्टोरेंट के नाम पर फ्री थाली देने का ऑफर देकर लोगों को फर्जी लिंक भेजकर फांसने का तरीका अभी खूब चलन में है। 


4. E - wallet की पूरी जानकारी लेकर ही इनका उपयोग करें। किसी अज्ञात व्यक्ति की भेजी गई रिक्वेस्ट को accept करके पिन डालने की भूल न करें। जब आपके खाते में कोई रकम डाली जाती है तब आपको अपना पिन नंबर डालने की कोई जरूरत नहीं होती। 


5. बिना किसी वास्तविक कारण के कभी भी किसी को अपना पहचान प्रमाण न दें।


6. बैंक की साइट तक पहुँचने के लिए कभी भी किसी ई-मेल के किसी लिंक पर क्लिक न करें।


7. ब्राउजर के एड्रेस बार में केवल URL टाइप करके अपनी बैंक की वेबसाइट पर पहुंचें। सतर्कता पूर्वक अपने बैंक की ऑफिसियल साइट का चुनाव करें। 


8. नौकरी की पेशकश करने वाले ईमेल या आपके लॉटरी जीतने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते का विवरण प्रदान न करें। अज्ञात प्रेषकों के भेजे ईमेल लिंक को खोलने से बचें। 

 

9. साइबर कैफे या साझा पीसी से इंटरनेट बैंकिंग सेवा का उपयोग करने से बचें।   


    कोरोना काल में ठगी के मामले काफी बढ़ गए हैं। इस लेख में यह जानकारी देने का हमारा उद्देश्य आपके पैसों की सुरक्षा करना है। जिससे आप सतर्क रहें और अपने मेहनत से कमाई गई रकम को सुरक्षित रख सकें। 


   आशा है ये आर्टिकल "Fake Call Frauds-बस एक कॉल और खाता साफ़" आपको उपयोगी लगा होगा। इसे अपने मित्रों तक शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल और सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें। 


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