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Tuesday, 16 February 2021

Franchise Vs Startup-फ्रैंचाइज़ी लें या स्वतंत्र बिज़नेस करें

Franchise Vs Startup-फ्रैंचाइज़ी लें या स्वतंत्र बिज़नेस करें 

जब आप नौकरी (Job) या व्यवसाय में से चुनाव करके अपने जीवन का प्रमुख निर्णय लेते हुए व्यवसाय को चुनते हैं तब आपके सामने दो विकल्प सामने आते हैं - पहला अपने दम पर एक व्यवसाय की स्थापना करना और दूसरा है फ़्रेंचाइज़िंग मॉडल चुनना। जब आप फ्रेंचाइजी लेते हैं तब आप उस कंपनी के ब्रांड, उसके व्यापार करने के तरीके, उसके द्वारा निर्धारित मूल्य एवं तकनीक का इस्तेमाल करके अपना बिज़नेस स्टार्ट कर सकते हैं, इसके लिए आप कंपनी को शुल्क अदा करते हैं।


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   फ्रेंचाइजी मॉडल में आप एक ज्ञात ब्रांड नाम के साथ एक जाँची परखी, बनी बनाई प्रणाली खरीदते हैं, यहां आप कंपनी के सिस्टम से बंधे होते हैं। जबकि स्वतंत्र बिज़नेस में सिर्फ आपकी कल्पनाशक्ति, कार्यक्षमता और प्रतिभा दांव पर लगी होती है। यहां आपको प्रयोग करके सीखना होता है और अपने लिए रास्ता बनाना पड़ता है।  


    अब यह सवाल आता है कि किसका चुनाव करें, प्रत्येक विकल्प की अपनी संभावनाएं हैं साथ ही  समस्याएं भी हैं। दोनों ही विकल्प के पक्ष और विपक्ष को जानकार आप यह तय कर सकते हैं कि आपकी स्थिति और व्यक्तित्व के लिए कौन सा सही है।


अपना बिज़नेस करें या फ्रैंचाइज़ी लें ( Franchise Vs Startup)


1. सफलता की संभावना -


जब आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करते हैं तो उसकी सफलता केवल आपके आईडिया और संचालन क्षमता पर निर्भर होती है। वहां बहुत से संदेह मन में आते हैं जैसे - क्या इस वस्तु की शॉप यहां सफल होगी? क्या नई दुकान या संस्थान को ग्राहक पसंद करेंगे? दुकान का सेटअप किस प्रकार से किया जाए जिससे अधिक से अधिक ग्राहक दुकान पर आएं? 


  अपने दम पर स्थापित किये गए बिज़नेस में विफलता की दर फ्रेंचाइजी की तुलना में अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि 20% स्टार्टअप व्यवसाय अपने पहले वर्ष में ही बंद हो जाते हैं, क्योंकि वे बिज़नेस की कठिनाइयों को नहीं झेल पाते। आपका स्वतंत्र व्यवसाय तभी चल सकता है, जब आप अकेले ही सभी परेशानियों का समाधान करते हुए आगे बढ़े। 


   अपने सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए आपको बिना किसी समर्थन या विशेषज्ञ प्रशिक्षण के देर तक काम करने में सक्षम होना चाहिए, तभी आप सफलता की उम्मीद कर सकते हैं। यदि आपको बिना किसी अनुभव के अपने दम पर यह संघर्ष कठिन लगता है, तो फ्रेंचाइजी मॉडल आपके लिए एक समझदार विकल्प हो सकता है।


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    स्वरोजगार का अपना अलग सौंदर्य है। यहां आप अपना कार्यक्रम निर्धारित कर सकते हैं। आप शो को ठीक उसी तरह चलाते हैं, जिस तरह से आप उसे चलाना चाहते हैं। कोई भी आपको यह नहीं बता सकता है कि आपको क्या करना चाहिए। 


   जब आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करते हैं तो ग्राहक आधार और स्थानीय प्रतिष्ठा बनाने में समय लगता है, भले ही आपने दुकान की ओपनिंग बहुत भव्य तरीके से की हो और उसका विज्ञापन भी ठीक से किया हो। इसके विपरीत जब आप एक फेमस ब्रांड नाम के साथ अपनी शॉप का विज्ञापन करते हैं तो ग्राहक आसानी से तैयार हो जाते हैं और कैश फ्लो बढ़ जाता है जिससे काम चल पड़ता है।


    अच्छे फ़्रेंचाइज़िंग का चुनाव करने पर आपको एक परखा हुआ सफल व्यवसाय मॉडल खरीदने का अवसर मिलता है जो एक सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम, एक ठोस आपूर्ति श्रृंखला और विशेषज्ञ तकनीकी सहायता के साथ आता है। कुछ सबसे प्रसिद्ध फ्रैंचाइजी में प्रभावशाली सफलता दर होती है, जिसमें असफलता की संभावना बहुत कम होती है। 


   यह विकल्प आपको सही तरीके से कदम रखने और ऐसे व्यवसाय को संभालने में सक्षम बनाता है जिसमें मौजूदा ग्राहक आधार, कैश फ्लो और पहले से ही एक कार्यबल है। फ्रेंचाइज़िंग व्यवसाय के स्वामी बनने पर आपको अपने संस्थान की डिजाइनिंग और संचालन का तरीका सोचने में माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। इसके लिए आपको  एक त्वरित और आसान तरीका मिल जाता है।


    यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि सिर्फ किसी ब्रांड नेम के जरिये बिज़नेस में सफलता की गॉरन्टी नहीं हो सकती। आपको बिज़नेस में सफलता तभी मिलेगी जब आप पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। यानि हर फ्रेंचाइजी सफल हो जाएगी, ऐसा कहना बिलकुल भी सही नहीं है। फ्रेंचाइजर भी फेल हो सकता है। यदि फ्रेंचाइज़र विफल हो जाता है, तो आपका व्यवसाय भी पीड़ित होगा।  


2. नियंत्रण -


जब आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करते हैं तो हर गतिविधि और नीति निर्धारण पर आप अपना नियंत्रण रखते हैं, यहां हर बड़े और छोटे निर्णय आपके द्वारा ही लिए जाते हैं। परन्तु एक फ्रेंचाइजी मॉडल बिज़नेस में आप फ़्रेंचाइज़र द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं।


    यदि आप रचनात्मक और नवीन प्रयोग करना चाहते हैं, तो आपके पास अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का विकल्प है। एक फ्रेंचाइज्ड बिज़नेस "प्लग एंड प्ले" टाइप बिज़नेस मॉडल प्रदान करता है, जिसमें आपको ऑपरेटिंग मैनुअल का पालन करना होता है।

 

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    फ्रैंचाइजी को अपने फ्रैंचाइज़र के ब्रांड नाम, ऑपरेटिंग सिस्टम, उपकरण, वर्दी आदि का उपयोग करने के लिए लाइसेंस प्रदान किया जाता है, जो कई वर्षों से ठीक-ठाक और परिपूर्ण हैं। यहाँ आपको फ़्रेंचाइज़र के ऑपरेटिंग सिस्टम का पालन करना चाहिए। 


    यदि आप ऐसे किसी सिस्टम से बंधकर कार्य करने में अपने आपको सक्षम नहीं पाते हैं तब आपको स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करना ही ठीक रहेगा, जिसमें अपनी पसंद के अनुसार स्वतंत्र होकर अपने संस्थान को नियंत्रित करते हैं। 


3. साइट चयन -


रिटेल कारोबार के क्षेत्र में बहुत प्रतिस्पर्धा है। यदि आप अपने बिज़नेस के लिए साइट चयन में गलती करते हैं तो यह आपके व्यवसाय के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। आपके व्यवसाय के अनुरूप लोकैलिटी का न होना, गलत सड़क का चुनाव करने जैसी त्रुटि आपके बिज़नेस में बिक्री को गंभीर नुकसान पहुंच सकती है। 


 एक फ्रेंचाइज़र आपको सही साइट खोजने में मदद कर सकता है। उसके पास अपने ब्रांड के लिए सर्वोत्तम साइट पहचानने का वर्षों का अनुभव होता है साथ ही वह उन्नत साइट चयन सॉफ़्टवेयर और रियल एस्टेट विशेषज्ञों की सेवाएं प्रदान कर सकता है। वे प्रॉपर्टी ओनर के साथ बातचीत करके शोरूम या दुकान किराये पर दिलवाने के लिए विशेषज्ञ सहायता भी प्रदान कर सकते हैं। ये कदम आपके व्यवसाय के लाभ की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटक हैं।


4. प्रशिक्षण और समर्थन -


जब आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करते हैं तो आप प्रारम्भ में "सीखने की अवस्था" में होते हैं। इस दौरान आप अपनी गलतियों से सीखते हैं और इसका आर्थिक मूल्य भी चुकाते हैं। आपको सीखना होता है कि व्यवसाय का प्रबंधन कैसे किया जाए, कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें प्रशिक्षित करना, अपने उत्पाद या सेवा की मार्केटिंग करना, एकाउंटिंग आदि बहुत सी बातें अपने व्यवसाय के अनुकूल सीखनी होती हैं। 


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   फ्रेंचाइज़र आपके व्यवसाय के हर पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। साथ ही व्यवसाय के शीर्ष पर बने रहने में आपकी सहायता के लिए कई उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। कई फ्रेंचाइज़र अपने फ्रेंचाइज़ी को ट्रैक पर रखने में मदद करने के लिए फील्ड सपोर्ट विशेषज्ञ उपलब्ध कराते हैं, उन्हें मैनेजर और लीडर बनने के लिए प्रशिक्षण देते हैं। आपको फ्रेंचाइज़ी लेते समय इस बात का पता लगाना चाहिए कि उस फ्रेंचाइज़र की प्रशिक्षण संबंधी नीति क्या है? क्योंकि सबकी अपनी अलग नीति होती है।  


  यदि आप अपना व्यवसाय करते हैं तो आप चैंबर ऑफ कॉमर्स या अन्य स्थानीय व्यावसायिक संगठनों में शामिल हो सकते हैं, जिनका समर्थन आपके पास होता है। एक फ्रैंचाइज़ी के रूप में आपको अपने फ्रैंचाइज़र से भी निरंतर समर्थन प्राप्त होता है। आपके व्यवसाय में आने वाली किसी भी समस्या के निदान के लिए अपने फ्रेंचाइज़र से मदद मांगना बेहतर है क्योंकि उनके पास पहले से ही उन समस्याओं को हल करने का अनुभव  होता है।


5. लागत -


फ्रेंचाइज़ी खरीदना आमतौर एक महंगा प्रस्ताव हो सकता है। इसमें आपको अन्य लागतों के अलावा  फ्रेंचाइज़र के साथ जुड़े रॉयल्टी भुगतान और मार्केटिंग लागत पर भी विचार करना होता है। फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए खर्चे आपकी लागत को बढ़ाते हैं और आपके शुद्ध मुनाफे को कम करते हैं। 


   यदि आपके पास एक आईडिया है, तो आगे बढ़कर उसे आप एक ऐसे बिज़नेस में बदल सकते हैं कि लोग आपसे उसकी फ्रेंचाइज़ी मांगने चले आएं। आपका अनूठा विचार एक दिन फ्रेंचाइज़ी देने वाला बन सकता है। 

 

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  यदि आप बड़ा सपना देखते हैं और उसे पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं तो अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना आपके व्यक्तित्व के लिए सही कदम हो सकता है। इसके लिए आपको अपने बिज़नेस में निरंतर सुधार लाते हुए उसे एक सफल बिज़नेस मॉडल बनाकर दिखाना होगा। आखिर आज जो सफल फ्रैंचाइज़र हैं उन्होंने भी ऐसा ही किया है।

 

    स्टार्टअप को बहुत कम लागत के साथ शुरू किया जा सकता है, यह रकम 10,000/- रूपये जितनी कम हो सकती है।  आप अपना व्यवसाय किसी छोटी सी जगह यहां तक कि अपने गेराज में भी शुरू  कर सकते हैं। जबकि फ्रैंचाइज़ी लेने के लिए आपके पास पर्याप्त जगह की व्यवस्था होनी चाहिए। फ्रेंचाइजी से संबंधित लागतों की तुलना में स्टार्टअप काफी कम महंगा है, यह बात अधिकतर फ्रेंचाइजी के साथ लागू होती है। 


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    छोटी कंपनियों की फ्रैंचाइज़ी 2 से 5 लाख तक मिल सकती है। आप अपने बजट के आधार पर स्थान की उपलब्धता और वहां पर मार्केट की स्थिति को देखते हुए फ्रैंचाइज़ी का चयन कर सकते हैं।फ्रैंचाइज़ी लेने से पहले आपको उसकी शर्तों को समझना होगा। 


   जिस कंपनी की फ्रैंचाइज़ी आप लेने जा रहे उसकी मार्केट वेल्यु कितनी है? वह कितने समय के लिए मिल रही है? क्या आप उसे आगे बढ़ा पाएंगे? कई बार फ्रैंचाइज़ी को बेचने पर प्रतिबंध होता है, इन सभी बातों का ध्यान में रखकर उस कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेने का फैसला करे, जिससे भविष्य की समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी।


   अधिकांश फ्रैंचाइज़ीज़ पांच से दस साल तक चलती हैं जबकि कुछ आजीवन के लिए होती है। बड़े नाम वाले फ़ूड फ्रैंचाइज़ी जैसे कि मैकडॉनल्ड्स, बर्गर किंग और केएफसी 20 - 25 साल तक चलते हैं। क्या आप केवल कुछ साल तक बिज़नेस चलाने का इरादा रखते हैं? या आप एक दीर्घकालीन बिज़नेस की स्थापना करना चाहते हैं। 


  किसी भी बिज़नेस की तरह एक फ्रैंचाइज़ी को भी प्रॉफिट की स्थिति में आने में समय लगता है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आपके पास तब तक सर्वाइव करने के लिए पर्याप्त पैसा है। यदि आप लोन लेकर काम शुरू करना चाहते हैं तो किसी ऐसे बैंक से बात करें जो फ़्रेंचाइज़ी बिज़नेस को फाइनेंस करने में माहिर हो।


6. मार्केटिंग -


खुद के बिज़नेस में मार्केटिंग और विज्ञापन की बात आने पर आप अकेले होते हैं। पर यदि आप एक पिज़्ज़ा हट फ्रेंचाइजी हैं तो आपके पास ब्रांड के बहु-मिलियन-डॉलर के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की मार्केटिंग और विज्ञापन की शक्ति है। इन लाभों के लिए आपको भुगतान भी करना होता है, फ्रैंचाइज़र के कोष में मासिक योगदान देकर।


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7. किन क्षेत्रों में फ्रैंचाइज़ी ले सकते हैं -


भारत में 750 से अधिक कंपनियों की फ्रेंचाइजी उपलब्ध है। सही फ्रेंचाइजी खरीदना, सही नौकरी की तलाश के समान है। सही चयन के लिए अपने कौशल, अनुभव और व्यक्तित्व का मूल्यांकन करें।  हालाँकि यह आवश्यक नहीं है कि आप अपने आपको केवल उन सेक्टरों तक सीमित रखें, जिसमें आप पहले काम कर चुके हैं। 


   अगर आप फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो आपके लिए सर्विस, रिटेल, फाइनेंशियल सर्विस, रियल एस्टेट, ट्रैवल, होटल, मोटल, फूड एंड बेवरेज, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, एन्टरटेनमेंट, ऑटोमोटिव, आईटी, हेल्थ और ब्यूटी केयर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खूब संभावनाएं हैं। आपके पास बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं -


A. खाद्य एवं पेय -


मैकडोनल्ड, डोमिनोज पिज्जा, बर्गर किंग, पिज्जा हट, डोसा प्लाजा, अमूल, चाय नगरी, मोमो नेशन कैफे के अलावा भी बहुत सी  कंपनिया है।


B. शिक्षा एवं ट्रेनिंग सेंटर -


शिक्षा के क्षेत्र में मदर्स प्राइड, किड्स गुरुकुल, स्मार्ट स्कूल, एक्शन कोच, IBT इंस्टिट्यूट,  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स, ब्रेन चेकर टेक्नो सर्विस, STC टेक्नोलॉजी और पिकासो डिजिटल मीडिया जैसे नाम शामिल हैं।


C. स्वास्थ्य एवं सोंदर्य -


हेयर लॉस कंट्रोल क्लिनिक, डाइट मंत्रा, अपोलो क्लिनिक, जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी स्टूडियो,  शहनाज़ हर्बल, पतंजलि, केवा आयुर्वेद हेल्थकेयर, दिव्य उपचार संस्थान आदि। 


D. रिटेल सेक्टर -


रिटेल के क्षेत्र में सियाराम सिल्क मिल्स, कोहलर इंडिया, बिग शू बाजार, बिग मार्ट, ट्रू मार्ट सुपर मार्केट्स, किताबों की दुकान बुक कैफे, किड स्पेस, महिलाओं के ब्रांड स्वास्तिक जैसी कम्पनियां शामिल हैं। इनके अलावा होटल क्षेत्र में मिंट होटल, ट्रीबो होटल्स, चॉइस होटल आदि शामिल हैं। 


   आशा है ये आर्टिकल "Franchise Vs Startup-फ्रैंचाइज़ी लें या स्वतंत्र बिज़नेस करें" आपको पसंद आया होगा, इसे अपने मित्रों को शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल एवं सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें।


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