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Wednesday, April 10, 2019

Black truth of share market. शेयर मार्केट का काला सच

Black truth of share market.शेयर मार्केट का काला सच 

शेयर मार्केट के विश्लेषकों से निवेशक हमेशा सुनते हैं  - यहां लम्बे समय (long term) तक निवेश करने की सोंचे और लाभ कमाएं। यह सुनकर नए निवेशक को लगता है कि शेयर मार्केट में पैसे लगाकर लाभ की गॉरन्टी हो जाती है। उसे लगता है, यहां शेयर खरीद कर 10 साल के लिए छोड़ दो फिर बेचकर कई गुना return पाओ। ये सोचकर वो यहां पैसे लगाने को तैयार हो जाता है। 

गुमराह होने से बचें - 

अभी गोल्ड में टैक्स बढ़ाकर और प्रॉपर्टी में कैपिटल गेन टैक्स का भय दिखाकर निवेशकों को गोल्ड और प्रॉपर्टी में निवेश से दूर करने का प्रयास हो रहा है।  निवेश के एकमात्र मार्ग के रूप में स्टॉक मार्केट का रास्ता दिखाया जा रहा है। यह खतरनाक स्थति है। क्योकि पिछले 2 - 4 साल में जिन निवेशकों ने शेयर मार्केट में पैसा लगाया है, उन्होंने अभी इसका बढ़त वाला एक रूप ही देखा है। 

       सोचिये उस समय क्या स्थिति होगी जब यह अपना दूसरा रूप दिखायेगा, जिसमें बाजार में क्रैश और ब्लडिंग होता है। ऐसे समय शेयर का भाव घटकर एक तिहाई पर रुकेगा या और नीचे जायेगा कोई नहीं बता सकता। इतिहास गवाह है कि किसी न किसी कारण से मार्केट ने अपना यह रूप समय -समय पर अवश्य दिखाया है। पर यह कब और किस कारण से होगा ये कोई नहीं जानता। 

     शेयर मार्केट की तरफ लोगों को आकर्षित करने के लिए वारेन बफेट जैसे निवेशकों के नाम गिनाये जाते हैं। निवेशक के सामने कुछ कंपनियों के चार्ट भी आते हैं। जिनमें  शेयर का भाव 10  साल में 200/- रूपये से बढ़कर 800/- रूपये होना बताया जाता है। यह सच है और इस बात से इंकार नहीं है कि 10 साल में कुछ कंपनियों के शेयर भाव अपनी लागत का 4 गुना या इससे अधिक ग्रोथ भी दिखाते हैं।

     सेंसेक्स और निफ़्टी नई ऊंचाइयां छू रहे हैं जिन्हें देखकर ऐसा लगने लगता है कि सभी निवेशकों का धन दुगना -तिगुना हो गया होगा। पर मार्केट में लिस्टेड सभी कंपनियों के शेयर भाव में वृद्धि नहीं होती। मार्केट के सूचकांक सेंसेक्स और निफ़्टी में बढ़त दिखने के बावजूद ऐसा होता है। इसका कारण निफ़्टी में 50 और सेंसेक्स में 30 कंपनियों का शामिल होना है। ये दोनों प्रमुख सूचकांक इनमें  शामिल कंपनियों के शेयर भाव को ही रिफ्लेक्ट कर पाते हैं। बहुत से शेयर पिछले 5 साल पहले जिस भाव में मिल रहे थे वो आज भी उससे कम या उसी भाव में मिल रहे हैं। उनका चार्ट देखेंगे तो पता चलेगा कि 2014 में जो शेयर 450/- का था वो पिछले 5 साल में 575/- का हाई लगाकर 2019 में वापस 435/- में आ गया। 
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कैसे डूबे निवेशक  ( how to loss money by investor)     

        

    शेयर मार्केट का दूसरा पक्ष भी है, जिसकी चर्चा बहुत कम की जाती है। जहां निवेशक की रकम 800/- से घटकर 200/- नहीं बल्कि मात्र 2/- रह गई। यहां हम ऐसे ही कुछ शेयर्स की चर्चा करेंगे जिनमे लम्बे समय तक रुकने (wait) के बाद भी निवेशक के हाथ कुछ भी नहीं आया और उसकी लगभग पूरी रकम साफ़ हो गई। 

1. Reliance Communications Ltd (RCOM ) -   

 इस  शेयर में निवेशकों की रकम किस तरह साफ़ हुई आइये जानते हैं। इस शेयर का भाव january 2008 में 792/- था जो february 2009 में घटकर 155/- रह गया और आज april 2019 में इसका भाव है - 2 रूपये 90 पैसे। अब बेचारे लॉन्ग टर्म निवेशकों की दशा का अंदाज़ लगा पाना आपके लिए मुश्किल नहीं होगा। 



2. Reliance Power Ltd ( RPOWER) - 

पावर क्षेत्र की इस कम्पनी पर कुछ विश्लेषकों ने लम्बे समय तक भरोसा रखने की बात निवेशकों से कही। वे निवेशकों को लगातार इसमें निवेशित रहने के लिए तर्क देते रहे कि देश को आगे बढ़ना है तो पावर सेक्टर बिना देश कैसे तरक्की करेगा।

      निवेशक उनकी बात मान कर नीचे के रेट में लगातार buying करते रहे। पर उन्हें कहाँ पता था कि जिस 90 रूपये को वो नीचे का रेट समझ रहे हैं वो आगे चलकर 9 -10 रूपये रह जाने वाला है। 

      RPOWER के शेयर का रेट may 2008 में 261/- था जो march 2009 में 95/- और अभी april 2019 में गिरकर 10/- रह गया है। जबकि sensex ने अभी अपना आल टाइम हाई बनाया है। 



3. Unitech Limited (UNITECH) - 

1972 में स्थापित यह कम्पनी भारत के रियल एस्टेट सेक्टर की टॉप कंपनियों में गिनी जाती थी। यूनिटेक ग्रुप की इस कम्पनी के शेयर, निवेशकों के पसंदीदा हुआ करते थे।

   इसके शेयर का रेट january 2008 में 521/- फिर january 2009 में 30/- रह गया। और अभी april 2019 में मात्र 1 रूपये 25 पैसे है। यदि कोई निवेशक लॉन्ग टर्म निवेश की बात गाँठ बाँध के बैठा हुआ हो तो उसकी भयावह स्थिति की कल्पना आप खुद कर सकते हैं। 

4. Jaiprakash Associates Limited (JPASSOCIAT) -

  निवेशकों को लम्बा नुकसान देने वाली कंपनियों में जे पी एसोसिएट भी शामिल है। इसके शेयर के रेट  january 2008 में 323/- से घटकर january 2009 में 45/- और अभी april 2019 में 5 रूपये 65 पैसे तक नीचे आ गये हैं। 


      इसके अलावा सुजलॉन एनर्जी, HDIL,पी सी ज्वेलर्स जैसी अनेक कम्पनियाँ हैं, जिनसे निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। यहां हम इन सभी कंपनियों के शेयर रेट  की चर्चा नहीं कर  पाएंगे।

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     हमारा उद्देश्य शेयर मार्केट के निवेशकों में भय पैदा करना नहीं है। हम केवल उन्हें मार्केट के इस काले सच से परिचित करवाकर सतर्क रहने की सलाह देना चाहते हैं। आइये जानते हैं कि एक निवेशक को किन बातों की समझ होनी चाहिए -

शेयर मार्केट का सच (truth of share market)


1. यहां गॉरन्टी नहीं चलती - 

किसी भी शेयर को लेते समय उसका फंडामेंटल, मैनेजमेंट, कम्पनी की स्थिति बैलेंस शीट आदि को जरूर देखें उनका विश्लेषण स्वयं करें या किसी एक्सपर्ट से करवाए। यदि रिपोर्ट्स पॉजिटिव हैं तो शेयर खरीद सकते हैं। पर यदि कोई उस शेयर के भाव बढ़ने की गॉरन्टी देने लगे तो समझ जाएं कि या तो उसे मार्केट की पूरी समझ नहीं है या फिर वो झूठ बोल रहा है। 

   आपके द्वारा निवेश किए गए किसी भी शेयर में एक जोखिम शामिल है, चाहे वह अभी कितना भी सुरक्षित क्यों न लगता हो। ऐसे बहुत से कारण हैं जो किसी कंपनी के शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

    उदाहरण के लिए- अर्थव्यवस्था (स्थानीय या वैश्विक), सेक्टर में होने वाले उतार चढ़ाव, कंपनी फंडामेंटल, तकनीकी, नए नियम, टैक्स, सामाजिक और राजनीतिक जोखिम और कम्पनी के किसी बड़े पदाधिकारी का इस्तीफा भी शेयर के रेट को बहुत प्रभावित कर सकता है।

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2. कम्पनी रिजल्ट पर भरोसा -  

हर निवेशक तेजी से ग्रोथ करने  वाली कंपनी में निवेश करना चाहता है। और इसके लिए किसी कंपनी की बैलेंस- शीट में  लगातार बढ़ती कमाई से बेहतर विकास का संकेत और क्या हो सकता है? कोई कंपनी जब तिमाही रिजल्ट की घोषणा करती है तो उस पर पिछली तिमाही से बढ़कर असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।  संचालकों पर उन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए बहुत दबाव होता है। क्योंकि जब वे ऐसा करने में विफल होते हैं, तो उनके शेयर की कीमत में गिरावट आ सकती है।

    इसलिए कभी-कभी वे अपने परिणामों में हेरफेर करते हैं। Satyam Computers जैसे कई कंपनियों के उदाहरण हैं जो अपने बैलेंस शीट  में हेरफेर करने के दोषी पाए गए हैं। 

3. शेयर प्राइस असंगत होना - 

जब किसी शेयर का प्राइस तेजी से बढ़ने लगता है तभी सामान्य निवेशक उसमें निवेश करने आगे आता है। उसे यह सोचने का समय नहीं होता कि यह रेट कम्पनी के earning रेश्यो (P/E) से कितना मैच हो रहा है या नहीं।रेट बढ़ने के समय उस कम्पनी के नाम के ढोल चारों तरफ पीटे जाते हैं।  इस तरह निवेशक फंसता है और 15 रूपये  की चीज़ को 50 रूपये में खरीदता है फिर बाद में पछताता है। शेयर खरीदने के लिए ज्यादा रेट देने से बचेंगे तभी यहां कमा पाएंगे। 

      शेयर टिप्स देने वाली कंपनियों के मैसेज आपके मोबाइल पर आने लगते हैं कि इस शेयर को खरीदिये, यह शेयर 1 माह में 10% बढ़ गया है अब इसका रेट साल भर में डबल होने वाला है। इस ट्रैप में नया निवेशक फंसता है। उसे यह नहीं पता होता कि किसी बड़े निवेशक को अपना बड़ा स्टॉक खाली करना था और उसके लिए ये न्यूज़ चलवाई गई थी। क्योंकि माल बेचने के लिए सामने बायर भी तो चाहिए।  


4. कंपनी को जानें - 

किसी कम्पनी के शेयर खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि उसके संचालकों का पिछला रिकॉर्ड क्या है? कम्पनी अपने काम के प्रति कितनी सीरियस है। सेबी की कड़ी निगरानी के बावजूद कुछ कंपनियां अपने व्यापार या उत्पादन को बढ़ाने के बजाय निवेशकों को बनाने में ज्यादा रूचि रखती हैं।

    कृत्रिम तरीके अपनाकर शेयर के रेट को बढ़ाकर निवेशक को जाल में फंसाना इनका मकसद होता है। निवेशक ऐसे शेयर्स किसी एडवाइस पर खरीद तो लेता है पर उसका उन्हें बेचकर  निकल पाना मुश्किल होता है। ऐसे पेनी स्टॉक से बचें। अब आप समझ गए होंगे कि इस मार्केट में कुछ भी हो सकता है। यहां ध्यान और ज्ञान दोनों की आवश्यकता है तभी निवेश करके कमाया जा सकता है।


     पहले अपना ज्ञान बढ़ाएं, ठीक से चीज़ों को समझें, अनुभव के लिए थोड़ी मात्रा शेयर खरीद कर देखें। जब अनुभव से चीज़ें क्लियर होने लगें तब समझदारी से निवेश करें। यह न सोचें कि हर शेयर कमा कर देगा, अगर शेयर का भाव नीचे आने लगे तो अपने लॉस की एक लिमिट जो आपने पहले से तय की है, वहां पर बेचकर निकल जाएँ। अन्यथा 120/- का 2/- यहां कभी भी हो सकता है।  


   आशा है ये पोस्ट  "Black truth of share market. शेयर मार्केट का काला सच " आपको पसंद आई होगी, इसे अपने मित्रों तक शेयर करें।  अपने सवाल और सुझाव के लिए कमेंट करें।  ऐसी उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विजिट करते रहें। 

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