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Wednesday, March 27, 2019

Money management in share trading. मनी मैनेजमेंट इन शेयर ट्रेडिंग

 Money management in share trading.मनी मैनेजमेंट इन शेयर ट्रेडिंग

पैसा बनाने के लिए शेयर मार्केट में इंट्राडे ट्रेडिंग बहुत लाभदायक हो सकती  है। यहां शेयर में इन्वेस्टमेंट की तरह आपका पैसा नहीं फंसता। डे ट्रेडर मार्केट बंद होने के पहले अपनी पोजीशन को square off कर देते हैं। जिससे  रात भर चैन से रहते हैं, क्योंकि अगले दिन सुबह मार्केट के gap up या gap down खुलने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

       डे ट्रेडर्स,  ट्रेडिंग ऑवर के दौरान  पिनपॉइंट सटीकता के साथ ट्रेडों में एंट्री करने और बाहर निकलने में सक्षम होते हैं। ये सक्षमता धीरे धीरे काफी अनुभव के बाद आती है। 

bull chart by coin
       इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मिलने वाले मार्जिन (लीवरेज) का लाभ लेकर  कम पूँजी से बड़ा ट्रेड करके कुछ घंटे या कभी कभी मिनटों में अच्छा प्रॉफिट बना लेते हैं।  हालांकि, अधिकतर डे ट्रेडर पैसे के खराब धन प्रबंधन ( money management) के चलते अपनी रकम खो देते हैं। कुछ समय ट्रेडिंग के बाद मार्केट का अनुभव उन्हें जरूर मिल जाता है पर तब तक अपनी पूँजी गवां कर मार्केट से बाहर होना पड़ता है। इसलिए नए ट्रेडर को इंट्राडे ट्रेडिंग से बचने को कहा जाता है। 

         यहां आपका पैसा ही पैसा कमा सकता है अगर पैसा चला गया तो ट्रेड नहीं हो सकता। ट्रेड नहीं होगा तो कमाई कैसे होगी। इसलिए शेयर मार्केट में ट्रेड  करने के लिए अपनी रकम को "मनी मैनेजमेंट" के साथ उपयोग में लाएं तभी यहां टिक सकेंगे और टिकेंगे तभी मुनाफा  कमा पाएंगे।   

 डे ट्रेडिंग में मनी मैनेजमेंट कैसे करें 



1. आपको कितना जोखिम उठाना चाहिए - 

आपकी ट्रेडिंग पोजीशन का आकार, आपके अकाउंट में उपलब्ध रकम पर निर्भर करेगा।  डे ट्रेडिंग की सफलता की कुंजी बड़े लॉस से बचने में  है। किसी एक ट्रेड में  आपको अपनी रकम का 2% से अधिक रिस्क नहीं उठाना चाहिए।

        मान लीजिये आपके अकाउंट में 1 लाख रूपये हैं तो किसी भी ट्रेड में आप 2000/- रिस्क ले सकते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो यदि आपके 5 ट्रेड गलत पड़े तो आपका नुकसान होगा -2000 x 5 =10000/-  अब आपके पास बचे 100000 -10000 =90000/- इसका अर्थ हुआ अब सिर्फ 90 हजार रूपये से ही ट्रेडिंग कर पाएंगे।

      कम रकम से ट्रेड करके लॉस की भरपाई करना मुश्किल होगा। अगर मार्केट में इंट्राडे  ट्रेडर बनना है तो जब भी आप ट्रेड करने उतरे तो एक निश्चित रकम (trade size) के साथ उतरना जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो मुनाफा कमाना तो दूर की बात होगी जल्दी ही अपनी पूरी रकम से हाथ धो बैठेंगे। इससे बचने के लिए अपनी कुल रकम में से केवल आधी रकम से ट्रेड कीजिये। 

       इसका मतलब है 1 लाख में से 50 हजार रूपये को सुरक्षित रखना है और शेष 50 हजार में मार्जिन सुविधा लेते हुए ट्रेड करना है। अगर आपने  4  गुना इंट्राडे मार्जिन लिया  तो 2 लाख का ट्रेड कर  पाएंगे। इसमें 1% का लॉस हुआ तो 2000/- का  लॉस होगा। 

         इस तरह अपनी रिज़र्व रकम के बल पर 25 सौदे तक अपनी पूरी ताकत के साथ गेम में बने रह पाएंगे (यह एक बुरी से बुरी परिस्थिति हुई ,ऐसा नहीं होगा कि लगातार 25 गेम गलत पड़े). 
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2. प्रॉफिट छोटा और लॉस बड़ा लेना  - 

डे ट्रेडर से होने वाली ये सबसे कॉमन मिस्टेक है। जो ट्रेडर के धन को बहुत तेजी से नष्ट करती है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं - एक ट्रेडर ने दिन भर में 8 ट्रेड किये जिसमें प्रॉफिट वाले 6 ट्रेड रहे, जिसमें उसे मुनाफा हुआ  1000 +300 +400 +300 +400 +200 =2600.  उसके 2 ट्रेड गलत पड़े मतलब उल्टी दिशा में चले। जिनसे जल्दी निकलने बजाय उसने वेट किया और लॉस बढ़ते बढ़ते  6000 +7000 =13000 हो गया।

          इस तरह 8 में से 6 ट्रेड सही होने पर भी घाटा उठाना पड़ा। यहां प्रॉफिट कमाने के लिए, ये जरूरी नहीं कि हर बार आपका ट्रेड सही पड़े। ज्यादा जरूरी है, सौदा गलत पड़ने पर कितने कम से कम लॉस में ट्रेड से बाहर निकले। 

        नए ट्रेडर की विडंबना यही है वो प्रॉफिट तो छोटा बुक करके निकल जाता है, परन्तु लॉस होने पर इंतज़ार (wait) करता है। उसे लगता है अभी ये स्टॉक मेरी दिशा में चलने लगेगा। कभी कभी स्टॉक घूम भी जाता है पर ऐसा मौका बहुत कम आता है। यही इस मार्केट की अदा है।

        ऐसे में  वो ट्रेडर भगवान से मिन्नतें करता है कि शेयर का प्राइस मेरी चाही गई दिशा में आ जाए।  दोस्तों से पूछता है, सबकुछ करने को तैयार होता है पर सौदा काटने को तैयार नहीं होता जब तक कि लॉस उसकी बर्दाश्त के बाहर न हो जाए या ब्रोकर मार्जिन के चलते उसे बाहर न करे। इस तरह 2 हजार का लॉस बढ़कर  6 -8 हजार का हो जाता है। 



3. स्टॉप लॉस मैनेजमेंट -  

हर एक्सपर्ट आपको  स्टॉप लॉस राशि निर्धारित करने की सलाह देते हैं।  एक सामान्य नियम की तरह बताया जाता है कि मुनाफा 2% रखते हैं तो स्टॉपलॉस 1% का रखिये। पर अगर आपको कुछ महीनों का ट्रेड अनुभव होगा तो आप जानते हैं की mostly टारगेट की जगह स्टॉपलॉस हिट होता है। आप अक्सर देखते हैं कि पहले आपका स्टॉपलॉस हिट किया और बाद में वो स्टॉक आपके  डायरेक्शन में चला।

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        इससे आपको लगने लगता है  कि कोई मेरे स्टॉपलॉस को देखकर जान बूझ के हिट कराता  है।  दरअसल स्टॉक मार्केट में सामान्य नियम काम नहीं करते। जो स्टॉक हाई वोलेटाइल होगा वो 1% का स्टॉपलॉस easily हिट करेगा क्योंकि उसका वाइब्रेशन रेंज अधिक होता है।

      इसलिए स्टॉपलॉस फिक्स रखने का नियम सही  प्रतीत नहीं होता है।  वैसे आपको हर ट्रेड  के लिए स्टॉप लॉस ऑर्डर की आवश्यकता जरूर है, लेकिन यह सभी शेयर के लिए एक फिक्स परसेंटेज में नहीं रखा जा सकता।

 4गलत ट्रेड से जल्दी निकलें

मान लीजिये  हमने 2% स्टॉप लॉस के आधार पर कोई ट्रेड लिया। ट्रेड लेने के बाद वो स्टॉक आपके दिशा के  विपरीत धीरे धीरे चलना शुरू कर देता है। आपको क्या लगता है कि हर लॉस वाले ट्रेड को अपने स्टॉपलॉस  तक आने देना चाहिए?  मेरे हिसाब से बिलकुल नहीं। 

       जिस मिनट आप देखते हैं कि ट्रेड  गलत है, छोटे हिट के साथ बाहर निकलें। 2% स्टॉपलॉस को हिट करवाने का तब कोई अर्थ नहीं है, जब  स्टॉक ने अपनी चाल बदल ली है। यहां  0.25% या 0.5% नुकसान लेकर निकल जाना ठीक है, जबकि आपके प्रॉफिट वाले स्टॉक 1% -3% की रेंज  में हैं। इस तरह आप गेम जीतेंगे।

        यहां  याद दिला दूँ  कि  2% स्टॉप लॉस, हाई वोलेटाइल स्टॉक या मार्केट की अप्रत्याशित चाल  के लिए है, और  स्टॉप लॉस हिट होना आपका लक्ष्य नहीं है। यदि आप गलत दिशा में बैठे  हैं, तो आपमें  स्टॉपलॉस  को हिट होने से पहले निकलने की हिम्मत होना चाहिए।


        इस लेख  "मनी मैनेजमेंट इन शेयर ट्रेडिंग"  के द्वारा आपने जाना कि इन टिप्स के जरिये कैसे हम ट्रेडिंग करके लाभ कमा सकते हैं और अपने धन को तेजी से बढ़ा सकते हैं ऐसी ही उपयोगी जानकारी के लिए email subscribe करें जिससे नए लेख की सूचना आपको मिल सके। इस वेबसाइट पर विजिट करते रहें। यदि आपका कोई सुझाव या सवाल हो तो कमेंट में पूछ सकते हैं।

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2 comments:

  1. Hi sir I read u r blog. And find it is really a wonderful information to me like beginners.
    But I m still confuse that where should I invest if I have only 2 or 3 lakh per investment capacity. Plz guide.

    One more thing I wish to share with you that I m a writing Btech. Books from yr 2000 and approx 33 books published till now.
    So if you ask to read any book to learn then it will not a problem for me . But how I select such book , I could not decide yet. So I request to help me in this regard.

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    1. Vidhyarthi sir, post pdhne ke liye dhnywad. ap invest krna chahte hain to 30-35 lakh ka housing board se koi indivisual mkan lene ki sochiye. apni capacity ke hisab se uski instalment bhriye sath hi us mkan ko rent par utha dijiye. is trh apki ek property bn jayegi, jise baad me sell krke achcha munafa ho skega.

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