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Tuesday, February 12, 2019

Gulab (rose) kaise lgaye, gulab ki dekhbhal kaise kre.

गुलाब (rose)कैसे लगाएं, गुलाब की देखभाल कैसे करें 

अगर आप फूलों के शौक़ीन हैं  तो आपके घर या गार्डन में गुलाब का पौधा जरूर होगा। अपने विभिन्न रंगों और आकार - प्रकार के चलते गुलाब हर किसी का मन मोह लेता है तभी तो सदियों से गुलाब फूलों का राजा बना हुआ है।

        भारत में गुलाब हर जगह उगाया जाता है। बागबगीचों, खेतों, पार्कों, सरकारी व निजी इमारतों के अहातों में, यहाँ तक कि घरों की ग्रह-वाटिकाओं की क्यारियों और गमलों में भी गुलाब उगा कर उस का आनंद लिया जाता है। गुलाब पूरे उत्तर भारत में, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश में जनवरी से अप्रैल तक खूब खिलता है। दक्षिण भारत में खासतौर पर बंगलौर में गुलाब की भरपूर खेती होती है।

गुलाब की किस्में --

भारत में उगाई जाने वाली गुलाब की परम्परागत किस्में हैं, जो देश के अलग अलग इलाकों में उगाई जाते हैं, विदेशों से भी  किस्में मंगा कर उनके  बीच क्रास कर अनेक नई व उन्नत किस्में तैयार की गयी हैं, जो अब अपने देश में बहुत लोकप्रिय हैं। 


        भारतीय गुलाब विशेषज्ञों ने देशी किस्मों में भी नयी विकसित 'हाईब्रिड' किस्में जोड़ कर गुलाब की किस्मों की संख्या में वृद्धि की है। इस दिशा में दिल्ली स्थित भारतीय  कृषि अनुसंधान संस्थान का कार्य ख़ास उल्लेखनीय है। दक्षिण भारत में भारतीय बागबानी अनुसंधान संसथान, बंगलौर ने भी किस्मों के विकास और  वृद्धि में भरपूर कार्य किया है।

                  
      मात्र शौक और सजावट के लिये गुलाब का पौधा जब गमले में उगाया जाए तो किस्मों का चुनाव भी उसी के अनुसार किया जाना चाहिए। व्यावसायिक स्तर पर गुलाब की खेती करनी  हो तो वैसी किस्मों का चयन करें। इस बारे में प्राय: सभी बड़ी नर्सरियों में पूरी जानकारी मिल सकती है।

        वैसे तो विश्व भर में गुलाब की किस्मों की संख्या लगभग 20 हजार से अधिक है, जिन्हें विशेषज्ञों ने विभिन्न वर्गों में बांटा है लेकिन तक्नीकी  तौर पर गुलाब के 5 मुख्य वर्ग हैं, जिन का फूलों के रंग, आकार, सुगंध और प्रयोग के अनुसार विभाजन किया गया है, जो इस प्रकार  है:- हाईब्रिड टीज, फ्लोरीबंडा, पोलिएन्था वर्ग, लता वर्ग और मिनिएचर वर्ग। 

        

     जहाँ भी गुलाब खिलता है, सब ओर इस की सुरभि व्याप्त हो जाती है। फरवरी-मार्च में गुलाब अपने पूर्ण यौवन और बहार पर होता है। 

 गुलाब का पौधा कैसे लगायें 

पौधा लगाने की जगह -

पौधा लगाने के लिए आपको किसी ऐसे स्थान का चुनाव करना होगा जहां दिनभर में कम से कम 6 घंटे धूप मिले। ऐसी जगह चुनें जहां पर अन्य पेड़-पौधों की जड़ों या शाखाओं की बहुलता न हो और बरसात में पानी का जमाव ना  होता हो। 

      गुलाब के प्रत्येक झाड़ को लगाने के लिए  फावड़ा या  गैंती  का इस्तेमाल कर के 18 इंच  चौड़ा और 18 इंच  गहरा गड्ढा खोदें। बहुत सटीक माप के गड्ढे की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन लगभग उपरोक्त माप का गड्ढा अधिकांश गुलाब के लिए उपयुक्त होता है।

     गड्ढे से निकली हुई मिट्टी में थोड़ा सा कम्पोस्ट मिलाएँ। यदि आप एक से अधिक पौधा लगाना चाहते हैं तो उनके बीच में कुछ फीट का अंतर रखें ताकि उनकी जड़ों को बढ़ने और फैलने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे।

कलम से लगाएं -- 

गुलाब की कलम लगती है. कलम से तैयार पौधे भी मिलते हैं. गुलाब को कलम से लगाने के लिए 6 से 8 इंच लम्बी शाखा लें जो ज्यादा पुरानी ना हो। काटते और लगाते समय इसका ऊपरी छिलका डैमेज नहीं होना चाहिए।

     इन्हें बडिंग द्वारा भी तैयार किया जा सकता है. गुलाब के पौधों के पोषण के लिए गोबर की खाद, खली की खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का प्रयोग, रासायनिक खादों की अपेक्षा बेहतर होता है.

गुलाब की देखभाल कैसे करें- 


गुलाब की छंटाई  --

गुलाब के पौधे को स्वस्थ रखने के लिए उसकी छटाई करना अत्यंत आवश्यक है।  गुलाब की छंटाई करते रहने से वे सुंदर और स्वस्थ बने रहते हैं। इसका उद्देश्य गुलाब के आस-पास सघन क्षेत्र की ऐसी सफाई करना है जिससे उसकी वृद्धि में कोई बाधा पैदा ना हो।

       छंटाई की योजना अलग-अलग मौसम के अनुसार अलग-अलग होती है परंतु जो कट (cut) आप लगाते हैं वह कली के आँख के ठीक ऊपर जहां से शाखाएँ निकलती हैं, वहीं तिरछा कट  लगाएं । वे छोटी-छोटी फूली हुई गोल होती  है, जो आमतौर पर परिपक्व पत्तियों के एक सेट के ऊपर स्थित होती हैं।

        जब आप छंटाई के लिए किसी कली के आँख का चुनाव करते हैं तो इस बात को ध्यान में रखें कि आपके चुनाव से गुलाब के झाड़ की आकृति पर विपरीत  प्रभाव  न पड़े।


     जरूरी बात ये है कि छटाई का मुख्य उद्देश्य पौधे के आकृति को सुन्दर बनाए रखते हुए पौधे से मृत टहनियों को अलग करना है। गुलाब के पौधे में जड़ के पास से कुछ शाखाएँ निकलती हैं, जिन्हें चूषक (suckers) भी कहते हैं और जो गुलाब के झाड़ से पोषक तत्वों को चूस लेते हैं, उन्हें  काट कर निकाल दें। गुलाब के फूल झड़ने के बाद बचे हुए डंठल को हमेशा क़ैची से काट कर अलग करते रहें। 

 गुलाब का पोषण  



1. सिरके का प्रयोग --

गुलाब के पौधे के विकास के लिए अम्लीय मृदा काफी अच्छी होती है. सफेद सिरके का इस्तेमाल आप मिट्टी की अम्लीयता को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. एक चम्मच सिरका पानी में मिला कर गोबर खाद के साथ प्रयोग करें।


 2. चाय की पत्ती  --

 चाय की पत्ती भी गुलाब के लिए उपयोगी है। घर में चाय बनाने के बाद बची हुयी चाय की  पत्ती को धोकर गुलाब के पौधे की मिटटी में मिला देने से पौधा अच्छी वृद्धि करता है। 


3. केले के छिलके -- 

जिस तरह केला हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, उसी तरह केले का छिलका गुलाब के पौधों के लिए खाद का काम करता है,  इसमें पोटैशियम की पर्याप्त मात्रा होती है. केले के छिलकों को मिट्टी में कुछ नीचे दबा दीजिए. इससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होगी और फूल भी खूबसूरत आएंगे.


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4. एक्वेरियम का पानी  - 

अगर आपके घर में एक्वेरियम है तो सप्ताह में एक बार जब उसका पानी चेंज करें, तब  उस पानी को फेंकने की बजाय गुलाब के पौधों  में डाल देने से पौधे व फूल अच्छे रहते हैं। 

सावधानियाँ -- 

बरसात के मौसम में गमलों और क्यारियों में बहुत देर तक पानी भरा न रहने दें। हर साल, पौधों की छंटाई कर, गमले के ऊपर की 2-3 इंच मिट्टी निकाल कर उस में उतनी ही गोबर की सड़ी खाद भर दें।

        हर 2-3 साल के बाद सम्पूर्ण पौधे को मिट्टी सहित नए गमले में ट्रांसफर कर दें। चाहें तो गमले की मिट्टी बदल कर ताजा मिश्रण भरें। इस प्रकार गुलाब के पौधे की थोड़ी देखभाल से आप गुलाब की सुंदरता और महक का आनंद उठा सकेंगे। इस पोस्ट में दिखाए गए उपरोक्त सभी गुलाब के चित्र मेरे फार्महाउस से लिए गए हैं। 

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