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Monday, November 18, 2019

Kabj ke karn aur upay- कब्ज के कारण और उपाय

Kabj ke karn aur upay-कब्ज के कारण और उपाय 

कब्ज (Constipation) रोजमर्रा की एक आम समस्या बनती जा रही है और इसने बुजुर्ग ही नहीं युवा पीढ़ी को भी अपने गिरफ्त में ले लिया है।अब टॉयलेट में लोगों को इतना समय लगने लगा है कि समय बिताने के लिए साथ में मोबाइल ले जाना पड़ता है।  वास्तव में कब्ज को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता जबकि यह समस्त रोगों की जननी है। यह स्वास्थ्य से जुड़ी कई परेशानियों को जन्म दे सकती है।  कब्ज की स्थिति में मल बहुत कड़ा हो जाता है जिससे  मलत्याग में कठिनाई होती है। 

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     कब्ज होने पर पेट की स्वाभाविक मल निष्कासन प्रक्रिया बाधित हो जाती  है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति को नित्य कम से कम सुबह मल त्याग करना आवश्यक है, ऐसा न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है। मल निष्कासन पूर्ण रूप से न होने पर व्यक्ति फ्रेश महसूस नहीं कर पाता इससे वह अपने दैनिक कार्य सही तरीके से करने में असमर्थ महसूस करता है। कब्ज़ के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं - 

कब्ज़ के लक्षण (Symptoms of Constipation) -

  1. खाने में अरुचि या भूख कम होना
  2. माथे या सिर में दर्द होना
  3. पेट में गैस बनना और मरोड़ पड़ना
  4. कमज़ोरी महसूस होना
  5. जी-मिचलाना
  6. शौच के बाद लगना कि पेट साफ नहीं हुआ
  7. पेट में भारीपन महसूस होना
  8. जीभ का रंग सफ़ेद या मटमैला हो जाना
  9. मुंह से बदबू आना
  10. कमर दर्द होना
  11. मुंह में छाले हो जाना



कब्ज़ के कारण  (Causes of Constipation) -

1. फाइबर युक्त भोजन  की कमी -

कब्ज़ होने का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ी गलत आदतें है। पश्चिम के अंधानुकरण और प्रचार तंत्र के चलते जंक फ़ूड का चलन हमारे देश में बढ़ता जा रहा है, जिसमें मैदे और नमक का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से हमारे शरीर को आवश्यक फाइबर नहीं मिल पाता जिससे भोजन को पचाना मुश्किल हो जाता है। मैदा, आँतों से चिपककर मल के निष्कासन की प्रक्रिया में बाधा उतपन्न करता है इसलिए मल सख्त हो जाता है और कब्ज़ हो जाती है।

     भोजन करते वक्त ध्यान भोजन को चबाने पर न होकर कहीं और होना, कब्ज का एक बड़ा कारण है। भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात्  जल्दबाजी में भोजन करने से आँतों को दांतों का कार्य करना पड़ता है जिससे वो धीरे धीरे कमजोर हो जाती हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि पत्येक कौर को 32 बार चबाना चाहिए जिससे पाचन संस्थान पर अनावश्यक जोर न पड़े। 
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2. पानी का कम सेवन -

 पानी की कमी से आंत अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाती।  पानी कम पीने से आंतें सूख जाती हैं और कब्ज़ हो जाती है। फाइबर को काम करने के लिए द्रव पदार्थों की ज़रूरत होती है और यह काम पानी बेहतर तरीके से करता है। जब आप पानी कम पीते हैं और चाय-काफी का अत्यधिक सेवन करते हैं तब यह कब्ज का कारण बनता है। इसलिए प्यास लगने पर पानी का सेवन करें न की किसी कार्बोनेटेड ड्रिंक अथवा चाय-कॉफी का। 

3. दवाइयों का प्रयोग -

आज अधिकतर लोग डॉयबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से खाते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं अत्यधिक खाई जाती हैं इसके अलावा पेट दर्द या फिर सिरदर्द के लिए कोई भी दवा खा लेते हैं। इस तरह छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दवा खाने से विभिन्न तरह के साइड इफेक्ट्स होते हैं और कब्ज़ उनमें से एक है। 

     हम पौष्टिक भोजन से ज्यादा स्वास्थ्य अनुपूरक (हेल्थ सप्लीमेंट्स) पर ज़ोर देते हैं। विशेषज्ञों की सलाह के बिना प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम के सप्लीमेंट्स ज़्यादा खाए जाते हैं, जो अन्य समस्याओं के अलावा कब्ज़ का कारण बनते हैं।

4. श्रम की कमी और व्यायाम का अभाव -

घरेलू कार्यों में मशीनीकरण के कारण शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है और व्यस्तता का बहाना बनाकर व्यक्ति, व्यायाम करने से भी बचना चाहता है। शारीरिक गतिविधि में कमी होने से हर अंग का कार्य प्रभावित होने लगता है। इस आलसीपन के कारण हमारा मेटाबॉलिज्म ख़राब हो जाता है और कब्ज़ से जूझना पड़ता है। 

5. अत्यधिक तनाव लेना -

हमारी भावनाओं का हमारे शरीर पर अत्यधिक असर पड़ता है। यदि हम चिंता फ़िक्र में डूबे रहेंगे तो भोजन का पाचन कार्य भी सही तरीके से नहीं हो सकेगा। किसी भी तरह का दबाव या तनाव होने पर उसका असर पेट की समस्या के रूप में दिखाई पड़ सकता है। इसलिए अत्यधिक तनाव लेना भी कब्ज़ का मुख्य कारण है।

6. मूत्र को रोकना -

 व्यस्तता के कारण अथवा और भी कई कारणों से लोग वाशरूम नहीं जाते और अक्सर मूत्र को देर तक रोककर रखते हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। समय पर मूत्र त्याग न करने से न सिर्फ मूत्राशय से संबंधित रोग हो सकता है, बल्कि कब्ज़ की समस्या भी हो सकती है।
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7. नींद की कमी -

 इस भागदौड़ भरे जीवन में काम का इतना दबाव है कि हम आवश्यक  नींद तक नहीं ले पाते हैं। भागदौड़ के कारण भोजन और निद्रा का समय निश्चित नहीं कर पाते। पर्याप्त नींद न लेने के कारण पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता और कब्ज़ हो जाती है।

8. गर्भावस्था के कारण -

 अक्सर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कब्ज़ हो जाती है। आमतौर पर यह समस्या गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही होती है।ऐसा प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस का स्राव होने के कारण होता है, जिससे मांसपेशियों में संकुचन होता है और आंतों तक भोजन धीमी गति से पहुंचता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त आयरन का सेवन करती हैं, जिससे कारण भी कब्ज़ होती है। 


कब्ज दूर करने के उपाय -

कई बार हम कब्ज से राहत पाने के लिए दवाएं भी खा लेते हैं, परन्तु इन दवाओं के लगातार सेवन से इनकी लत हो सकती है, जो सेहत को और नुकसान पहुंचा सकती है। इससे बचने के लिए आइये जानते हैं कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में जो आपको कब्ज से राहत दिलाएंगे। 


1. संतुलित भोजन -

अपने खाने में फाइबर युक्त भोजन और सलाद को शामिल करें। अंकुरित अन्न,  मौसम के अनुसार उपलब्ध फल और सब्जियां अपने आहार में अवश्य शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां, मक्का, बिना चोकर निकला गेहूं का आटा, मूली, पत्ता गोभी और किशमिश इन सभी में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है।  

    पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पी सकते हैं। पुरानी से पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है। अंगूर में भी कब्ज निवारण के गुण हैं।  जब तक बाजार में अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।

     कब्ज से बचने का एक अच्छा तरीका यह है कि आप ठंडे खाने और कोल्ड ड्रिंक से दूर रहें। ताज़ा बना हुआ गर्म खाना खाएं और हल्का गर्म पानी पीएं। इस बात का भी ध्यान रखें कि दो भोजन के बीच पर्याप्त अंतर हो जिससे भोजन का पाचन सही तरीके से हो सके। जल्दी जल्दी खाते रहने से शरीर को भोजन पचाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और यह कब्ज को बढ़ा सकता है। इसलिए बिना भूख के भोजन न करें। 



2. पर्याप्त पानी पियें -

कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए।  पानी के उचित सेवन से आँतों में मल जमा नहीं होता और कब्ज से राहत मिलती है। कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को सुबह उठते ही कम से कम 2 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए। 


3. व्यायाम और योगासन करें -

सुबह-सुबह खाली पेट घूमने जाये व हल्का व्यायाम और कपालभाती योगासन करें।  कब्ज को जड़ से खत्म करने का यह सबसे अच्छा साधन है, हरियाली युक्त जगह में सुबह की सैर और हल्का व्यायाम करने से कब्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है। 


4. त्रिफला चूर्ण का सेवन करें -

कब्ज दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं।   त्रिफला, तीन फलों हरड, बहेडा और आंवला से मिलकर बनता है।  कब्ज से राहत के लिए त्रिफला का इस्तेमाल बेहद कारगर है।  इसके लिए रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण का सेवन हल्के गर्म पानी के साथ करें। 


5. अंजीर का प्रयोग करें -

अंजीर का प्रयोग पुरानी से पुरानी कब्ज में भी राहत प्रदान करता है।  इसके लिए 3-4 अंजीर को रात्रि में पानी में भिगोकर रखें फिर सुबह इसका सेवन करें। अंजीर कब्ज हरण फ़ल है यह आंतों को सक्रिय कर कब्ज का निवारण करता है।

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6. अरंडी का तेल -

कब्ज की समस्या दूर करने के लिए एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करें। सप्ताह में 3 बार इस प्रयोग को कर सकते हैं। इससे आंतो में चिपका मल निकलने से कब्ज साफ़ हो जाता है। एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीने से भी कब्ज से छुटकारा मिलता है।  


7. आवंला जूस का सेवन करें -

आवंला और एलोवेरा जूस का खाली पेट सेवन करें।  इससे कब्ज के अलावा पेट की अन्य समस्याएं जैसे गैस और एसिडिटी में भी राहत मिलती है।  इनका सेवन सामान्य तौर पर कर सकते हैं।  

   

 8. ईसबगोल का प्रयोग -

1 या 2 चम्मच ईसबगोल की भूसी को रात्रि के समय एक गिलास पानी में मिलाकर सेवन करें। कब्ज दूर करने के लिए यह पूर्णतया सुरक्षित प्रयोग है। यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।


9.  अन्य प्रयोग -

 A. फल खाएं - 

 अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये बहुत फायदेमंद  हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है जिससे मल आसानी से विसर्जित करने में मदद मिलती है। पके केले खाना भी कब्ज को दूर करने में फायदेमंद होता है परन्तु  कच्चा केला कब्ज को बढ़ा सकता है। 

B. गेहूँ के जवारे -

गेहूँ के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।

C. टमाटर का सेवन -

टमाटर कब्‍जियत दूर करने के लि‍ए बहुत उपयोगी है। टमाटर, पेट में जमा विषाक्त पदार्थ नि‍कालने और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। 

D. मुनक्का सेवन करें -

मुनक्का पेट के लिए बहुत लाभप्रद होती है। मुनक्का में कब्ज नष्ट करने के गुण पाए जाते हैं। इसके लिए 7 -8 मुनक्का लेकर 1 गिलास दूध में इतना उबालें कि दूध आधा रह जाए।  हल्का गर्म रहने पर इसे सोने के आधे घंटे पहले सेवन करें।


E. अलसी का सेवन करें -

अलसी के बीज पानी के साथ सेवन करें या अलसी के 20 ग्राम बीज लेकर पावडर बनालें। एक गिलास पानी में यह पावडर डालें और 3 -4 घन्टे तक गलने के लिए छोड़ दें फिर इसे पी जाएं। अलसी में प्रचुर मात्रा में ओमेगा फ़ेटी एसिड्स होते हैं जो कब्ज निवारण में उपयोगी हैं।


F. निम्बू का प्रयोग -

एक गिलास हल्के गरम पानी में निम्बू निचोड़कर सुबह और रात्रि में सोते समय सेवन करें।  इस प्रयोग से पुरानी से पुरानी कब्ज भी धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।  सुबह के समय हल्के गर्म पानी में 1 निम्बू का रस और नमक मिलाकर पीने से पेट अच्छे से साफ़ होता है। 


G. शहद का प्रयोग -

 एक गिलास जल में 1-2  चम्मच शहद और आधा निम्बू का रस मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन में 2 बार पीना हितकर है। 


H. दूध के साथ घी का प्रयोग -

एक गिलास दूध में 1 से 2 चम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज दूर होती है। 

नोट - उपरोक्त सभी नुस्खे कब्ज के उपचार में उपयोगी हैं परन्तु इन्हें प्रयोग में लाने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति और रोग की अवस्था का विचार अवश्य कर लेंवे।  

    आशा है ये लेख "Kabj ke karn aur upay- कब्ज के कारण और उपाय " आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इसे अपने मित्रों तक शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल और सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही अन्य उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें।

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