The Truth About Mutual Funds-म्यूचुअल फंड्स की सच्चाई - sure success hindi

success comes from knowledge

Breaking

Post Top Ad

Tuesday, May 19, 2020

The Truth About Mutual Funds-म्यूचुअल फंड्स की सच्चाई

The Truth About Mutual Funds-म्यूचुअल फंड्स की सच्चाई 

म्यूचुअल फंड एक प्रकार का निवेश है जहां निवेशकों का समूह अपने पैसों को विविध परिसंपत्तियों में निवेश करने के लिए एक साथ रखता है। इन पैसों को निवेश करने के लिए एक फण्ड मैनेजर होता है जो अपनी कुशलता से यह निर्धारित करता है कि इन पैसों की वृद्धि किस प्रकार हो सकेगी। 

   म्यूचुअल फंड विभिन्न प्रकार के होते हैं,  इनमें अधिकतर स्टॉक, बॉन्ड और अन्य मनी मार्केट एसेट शामिल हैं। 
touchscreen-m-f

  यदि आप म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहें तो आपके लिए बहुत सी कंपनियों के विकल्प मौजूद हैं। इन कंपनियों द्वारा अनेक प्रकार के ऑफर दिए जाते हैं। 
 शेयर बाजार में निवेश के इच्छुक निवेशकों को म्यूच्यूअल फंड्स की तरफ आकर्षित करने के लिए उन्हें समझाया जाता है कि चूँकि आपको शेयर बाजार की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना आपके लिए श्रेष्ठ रहेगा और उन्हें अपेक्षाकृत कम लागत पर एक विविध पोर्टफोलियो में निवेश करने का लाभ बताया जाता है। 

    हालांकि अधिकतर म्यूचुअल फंड जो रिटर्न कमाते हैं वह शेयर मार्केट में हुई ग्रोथ की तुलना में काफी कम होता है। म्यूचुअल फंड निवेश में कुछ लाभ अवश्य हैं, लेकिन आपको म्यूचुअल फंड से जुड़ी कमियों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। 
concept-of-MF

म्यूचुअल फंड के नुकसान (Disadvantage of Mutual Funds


1. रिटर्न की कोई गारंटी नहीं -

म्यूचुअल फंड अपनी प्रत्येक योजनाओं में किए गए निवेश के लिए रिटर्न की कोई गारंटी नहीं देते हैं और सरकार द्वारा भी म्युचुअल फंड से होने वाले नुकसान के खिलाफ बीमा नहीं किया जाता है, जैसा कि बचत खातों और कुछ बांड्स में नुकसानों के खिलाफ बीमा मिलता है। 

  इसलिए म्यूच्यूअल फंड्स के विज्ञापनों में आपको चेतावनी दी जाती है कि यहां निवेश करना बाज़ार के जोखिमों अधीन है और निवेश से पहले पूरे प्रस्ताव डाक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ें


    इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड द्वारा प्रदान किए गए जोखिम कम करने वाले दावों के बावजूद आपको नुकसान हो सकता है और यह भी संभव है कि आप अपने निवेश का अधिकांश पैसा खो सकते हैं। मार्केट में गिरावट के अलावा आपके नुकसान के अन्य बहुत से कारण हो सकते हैं।

   जैसे अगर किसी फण्ड मैनेजर के बेहतर रिकॉर्ड को देखते हुए आप उस म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगाते हैं परन्तु यदि वह मैनेजर उस कंपनी को छोड़कर किसी अन्य कम्पनी को ज्वाइन कर लेता है तब भी आपका निवेश प्रभावित हो सकता है।
investment-expert

2. बहुत अधिक विकल्प यानि कन्फ्यूजन -

सामान्य रूप से किसी म्यूचुअल फंड का चुनाव करना आसान काम नहीं होता है। क्योंकि सैकड़ों म्यूचुअल फंड हैं, और ये  निवेश उद्देश्य, आकार, रणनीति और शैली के अनुसार बहुत भिन्न होते हैं। इसलिए फंड चुनने की प्रक्रिया भी थकाऊ हो सकती है। 

  साथ ही विविधीकरण से म्यूचुअल फंड में निवेश करने में जोखिम खत्म होकर लाभ की गारंटी नहीं हो जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के फण्ड में निवेश करने से आप उन्हें वाच नहीं कर पाते और इस कारण नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। 

  आपको यह भी देखना होता है कि जिस म्यूच्यूअल फण्ड में आप निवेश करना चाहते हैं उसके लॉकिंग पीरियड की क्या स्थिति है। अगर लम्बा लॉकिंग पीरियड है और इस बीच आपको अपने पैसों की जरूरत पड़ती है तो आप परेशान हो सकते हैं। 

3. फीस और अन्य व्यय -

अधिकांश म्यूचुअल फंड प्रबंधन और परिचालन फीस लेते हैं जो फंड के अनुसार प्रति वर्ष लगभग 1.0% से 1.5% होता है। आपको हानि हो या लाभ कुछ म्यूचुअल फंड  इसके अलावा अन्य शुल्क भी लेते हैं। कुछ फंड इतनी बार शेयरों को खरीदते हैं और ट्रेड करते हैं कि लेनदेन की लागत में काफी वृद्धि होती है। 

   सारांश यह है कि आपको लाभ की गारंटी भले ही न हो परन्तु म्यूचुअल फंड प्रबंधक कंपनी आपके पैसों से ही अपना लाभ सुरक्षित कर लेती है। 
disadvantage-of-mf

4. खराब प्रदर्शन -

म्युचुअल फंड मैनेजर के लिए निवेश हेतु उचित और उपयुक्त वित्तीय प्रतिभूतियों का चयन करना कठिन काम होता है, ताकि अधिक रिटर्न हासिल किया जा सके। इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड में शेयर मार्केट इंडेक्स से बढ़कर रिटर्न देने की संभावना बहुत कम होती है। 

   औसत रूप से देखा जाए तो म्यूचुअल फंडों में से लगभग 75% सेंसेक्स और निफ़्टी जैसे प्रमुख मार्केट इंडेक्स को हराने में विफल होते हैं। इससे उन आलोचकों को बल मिलता है, जो सवाल करते हैं कि क्या पेशेवर फण्ड मैनेजरों के पास औसत निवेशक की तुलना में बेहतर स्टॉक-पिकिंग क्षमताएं हैं या नहीं।

5. आपका नियंत्रण नहीं होता -

म्यूचुअल फंड के प्रबंधक सभी निर्णय लेते हैं कि किन प्रतिभूतियों को खरीदना और बेचना है और कब क्या करना है। इस प्रकार एक निश्चित समय पर खरीदने या बेचने का फण्ड मैनेजर द्वारा लिया गया कोई निर्णय जरूरी नहीं कि आपके लिए फायदेमंद ही हो। 

  यदि उसके द्वारा अपने निजी हितों को साधने के लिए कोई पक्षपात पूर्ण निर्णय लिया जाता है, तो उसका परिणाम अंततः आपको ही भुगतना पड़ेगा। आपको यह याद रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर आप अपने पैसों के लिए किसी और पर भरोसा कर रहे हैं। कई साल पहले, वॉरेन बफेट ने फंड मैनेजर के बारे में यह कहा था -

“Professionals in other fields, like dentists, bring a lot to the layman, but people get nothing for their money from professional money managers.”- Warren Buffett. 

  अर्थात "अन्य क्षेत्रों में पेशेवर दंत चिकित्सकों की तरह, जो कि आम आदमी के लिए बहुत कुछ लेकर आते हैं, परन्तु लोगों को पेशेवर मनी मैनेजर्स से अपने पैसों के लिए कुछ भी नहीं मिलता है।" - वॉरेन बफ़ेट

also read -

Real estate knowledge-प्रॉपर्टी खरीदी में फ्रॉड से कैसे बचें 

Vastu for buying a house-घर खरीदने के वास्तु टिप्स 

6 Realistic ways to get rich-अमीर बनने के 6 प्रैक्टिकल तरीके 
portfolio-diversification

6. म्यूचुअल फण्ड और मैनेजर्स की सीमाएं -


1. म्यूचुअल फंड आमतौर पर एक निश्चित परसेंटेज में अपने नकदी भंडार को बनाए रखते हैं। जो कि एक साथ निकासी के खिलाफ सुरक्षा के रूप में होता है और निवेशकों को लिक्विडिटी (तरलता) प्रदान करता है।  इसका मतलब यह है कि फंड का कुछ पैसा परिसंपत्तियों के बजाय नकद में होता है, जो निवेशक के संभावित रिटर्न को कम करता है।

2. इसके विपरीत शेयर मार्केट अगर तेजी से गिर रहा हो तब भी एक निश्चित परसेंटेज से अधिक नगदी, म्यूचुअल फंड अपने पास नहीं रख सकते और बाज़ार में पैसा लगाते रहते हैं, जबकि गिरते बाजार में लगाया गया पैसा रिकवर होने में बहुत समय लग सकता है। 

3. इक्विटी फंड्स के मैनेजर गिरते बाजार में शार्ट करके पैसा नहीं बना सकते, वे केवल अपने पहले से खरीदे शेयर्स को ही बेच सकते हैं। इस प्रकार फण्ड मैनेजर एक हाथ का योद्धा होता है। जबकि शेयर बाज़ार का ट्रेडर ऐसे अवसर में शार्ट करके यानि पहले स्टॉक को बेचकर फिर रेट गिरने पर उसे खरीदकर पैसे बना सकता है। 

conclusion -

म्यूचुअल फंड ही नहीं बल्कि लगभग सभी निवेश-संभावनाओं में निवेश करने के कुछ नुकसान होंगे। परन्तु म्यूचुअल फंड के मामले में इनका चुनाव करते समय अपनी आवश्यकताओं और लिमिटेशंस (सीमाओं) को देखते हुए विचार करके नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकता है।

   आशा है ये आर्टिकल "The Truth About Mutual Funds-म्यूचुअल फंड्स की सच्चाई" आपको उपयोगी लगा होगा इसे अपने मित्रों को शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल एवं सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी प्राप्त करने  इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें।

also read -

Best investment options-सर्वश्रेष्ठ निवेश विकल्प 

Precautions while buying a flat-फ्लैट कैसे खरीदें

Emergency fund planning-इमरजेंसी फण्ड बनाने के फायदे 
  

1 comment:

  1. BAHUT BADIYA JANKARI DI SIR AAPNE
    THANK U VERY MUCH SIR

    ReplyDelete

Post Bottom Ad