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Wednesday, May 13, 2020

Start a Business or Share market-शेयर मार्केट के फायदे और नुकसान

Start a Business or Share market-शेयर मार्केट के फायदे और नुकसान 

स्टॉक मार्केट का करियर क्यों इतना अच्छा माना जाता है? ऐसे कई कारण हैं जो शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग से होने वाली कमाई को अन्य किसी व्यापार की तुलना में आकर्षक बनाते हैं।

   सही समय पर, सही शेयरों में निवेश के जरिये आप इतना लाभ अर्जित कर सकते हैं जो किसी भी अन्य निवेश विकल्पों से प्राप्त होने की उम्मीद नहीं कर सकते। 

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    आप विभिन्न तरीकों से शेयर बाजार से आय प्राप्त कर सकते हैं। आप कुछ वर्षों के लिए निवेश कर सकते हैं जिसमें शेयर का भाव बढ़ने के साथ साथ डिविडेंट का लाभ भी प्राप्त हो सकता है। नियमित रूप से मार्केट वाच करने में रूचि हो तो आप डिलीवरी आधारित ट्रेडिंग कर सकते हैं। अन्य विकल्पों में मार्जिन ट्रेडिंग और डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कर सकते हैं। 

   इन सभी प्रकार के ट्रेडिंग की प्रक्रियाएं और लाभ-हानि अलग-अलग हैं। आप इनमें से किसी भी व्यापारिक तरीके को चुन सकते हैं और शेयर मार्केट के जरिये अपने तरीके से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यहां हम शेयर मार्केट की तुलना किसी भी अन्य बिज़नेस से करते हुए कुछ व्यावहारिक बिंदु प्रस्तुत कर रहे हैं जो शेयर मार्केट में निवेश या ट्रेडिंग पर विचार करने में आपकी मदद करेंगे। 

शेयर मार्केट के फायदे (Benefits of Share market) -


1. किसी भी जगह से काम कर सकते हैं -

शेयर मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग आप कहीं से भी कर सकते हैं, अपने घर  या ऑफिस से, शहर से बाहर किसी पहाड़ या समुद्र के किनारे बैठ कर अथवा विदेश में छुट्टियों का मज़ा लेते हुए भी थोड़ा समय निकाल कर आप अपना काम कर सकते हैं। यहां तक कि बीमारी की हालत में भी यदि आपकी दिमागी स्थिति ठीक है तो भी अपना काम कर सकते हैं। 

  आपके पास इंटरनेट कनेक्शन युक्त स्मार्ट फ़ोन होना चाहिए। शेयर मार्केट में ट्रेड या निवेश करने के लिए आपके पास ऑनलाइन बैंकिंग की फैसिलिटी होना चाहिए और किसी ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खुलवाना और उसका ट्रेडिंग एप अपने मोबाइल में इंस्टाल करना होता है। 

  अन्य कोई भी बिज़नेस करने के लिए आपको जगह की आवश्यकता पड़ती है। कोई शॉप, गोदाम या फैक्ट्री लगाने के लिए बड़ी जगह की व्यवस्था करना आवश्यक होता है। फिर उस बिज़नेस के हिसाब से आवश्यक फर्नीचर, मशीनों आदि में निवेश करना पड़ता है। इस प्रकार का इनिशियल इन्वेस्टमेंट, शेयर मार्केट में काम करने के लिए नहीं करना पड़ता। 
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2. समय कम लगता है -

किसी भी अन्य बिज़नेस की तुलना में शेयर मार्केट में निवेश  और ट्रेडिंग करने पर बहुत कम समय देना पड़ता है।  शनिवार और रविवार को शेयर मार्केट बंद रहता है, इस तरह हफ्ते में 5 दिन का काम वह भी प्रतिदिन लगभग 6 घंटे का रहता है।

  इस समय अवधि के दौरान आप अपनी इच्छानुसार जब तक और जितना चाहें सौदे कर सकते हैं। मार्केट बंद होने के बाद अपनी लाइफ एन्जॉय करने के लिए आपके पास काफी समय होता है। 

3. बड़ी पूँजी की आवश्यकता नहीं -

किसी छोटी दुकान की स्थापना के लिए भी एक न्यूनतम पूँजी की आवश्यकता होती है परन्तु शेयर बाजार में आप अपना काम 2 -4 हजार रुपयों से भी शुरू कर सकते हैं। आपके पास किसी कंपनी का कम से कम 1 शेयर खरीदने का पैसा होना चाहिए। यह आप पर निर्भर है कि कितने शेयर्स में आपको निवेश या ट्रेडिंग करनी है। 

  यदि आप शेयर मार्केट में अपना काम बढ़ाना चाहते हैं तब भी यहां आपको कोई एक्सपांशन कास्ट नहीं लगती, जिस तरह किसी दूसरे बिज़नेस में अपना काम बढ़ाने के लिए बड़ा सेटअप चाहिए होता है और वर्कर्स की संख्या बढ़ानी पड़ती है, वैसा कुछ यहां नहीं करना पड़ता। 

   अभी तक यदि आप 10 शेयर्स लेकर ट्रेडिंग कर रहे थे तो अब क्वांटिटी के कॉलम में 100 या 1000 लिखकर अपना काम बढ़ा सकते हैं। बस आपके पास उतने शेयर्स में ट्रेड करने के लिए आवश्यक मार्जिन होना चाहिए।
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4. निवेश यानि कंपनी में हिस्सा -

जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं तब जितने ज्यादा शेयर्स (हिस्सा) खरीदते है, आप कंपनी के उतने हिस्से के मालिक बन जाते हैं। भले ही वह एक बहुत छोटा हिस्सा होता है परन्तु कंपनी द्वारा कमाए गए लाभ को डिविडेंट के जरिये आप भी प्राप्त करते हैं।

    इस प्रकार किसी कंपनी या बिज़नेस की स्थापना का कार्य आपके लिए कोई और करता है परन्तु शेयर खरीदकर आप उस बिज़नेस के भागीदार बन जाते हैं। आप उस कंपनी की ग्रोथ को वाच करते हैं और जब तक उसका बिज़नेस आपको प्रॉफिटेबल लगता है तब तक उसमें बने रहते हैं।

  जैसे ही आपको उसके बिज़नेस में कोई समस्या अथवा हानि की संभावना दिखाई पड़ती है वैसे ही उसके शेयर्स बेचकर उस बिज़नेस से बाहर निकलने की आज़ादी भी आपके पास होती है। यहां आप अपनी पसंद के सेक्टर की कंपनियों में निवेश का लाभ ले सकते हैं। 

5. किसी प्रोडक्ट को बेचना नहीं होता-

शेयर मार्केट पैसे से पैसा कमाने की जगह है, यहां पर आपको किसी तरह का कोई भी प्रोडक्ट खरीदना या बेचना नहीं होता है। आप शेयर या इंडेक्स में पैसा लगाते हैं और अपना सौदा स्क्वायर ऑफ करके पैसा प्राप्त करते हैं। आपका प्रॉफिट- लॉस पूरी तरह आपके एंट्री और एग्जिट पर निर्भर करता है।

   यह आप पर है कि किस रेट में किसी शेयर को खरीदकर कब उसे सेल करते हैं। आप अपनी रिस्क कैपेसिटी के अनुसार अपना प्रॉफिट और लॉस दोनों कहां तक लेना है, यह  डिसाइड कर सकते हैं। 

  किसी दूसरे बिज़नेस की तरह यहां किसी प्रोडक्ट को बनाने, उसकी ट्रांसपोर्टिंग या फिर उसे सेल करने के लिए ग्राहक की तलाश नहीं करना पड़ता। क्योंकि शेयर मार्केट में आपको पता ही नहीं होता कि किसने आपको शेयर बेचें हैं और कौन आपसे खरीद रहा है।

  यहां माल बेचने के लिए ग्राहकों को आकर्षित नहीं करना पड़ता, इसलिए यह एक ऐसा काम है जहां विज्ञापन की जरूरत नहीं पड़ती।
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6. यहां उधारी नहीं होती -

दूसरे किसी बिज़नेस की तरह यहां कोई उधारी नहीं चलती। शेयर लेते समय आपको पूरा पैसा लगाकर डिलीवरी लेनी पड़ती है उसी प्रकार शेयर्स बेचने पर आपके एकाउंट में पैसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा हो जाते हैं।

   ट्रेडिंग से आपका कमाया हुआ लाभ आपके एकाउंट में तुरंत दिखने लगता है और सौदा गलत पड़ने या नुकसान होने की दशा में आपके खाते से उतनी रकम काट ली जाती है। 

   इस प्रकार यहां कैश या नगदी हासिल करने में कोई परेशानी नहीं होती जबकि किसी भी दूसरे बिजनेस में लगाए पैसे को कैश में बदलने के लिए समय लग सकता है। 

7. मार्केट की मंदी में भी कमाई कर सकते हैं -

दुनियां के हर बिज़नेस की तरह यहां तेज़ी या रेट बढ़ने पर तो कमाई होती ही है परन्तु शेयर मार्केट में एक अनोखी खासियत है, ट्रेडर के लिए यहां शार्ट सेल की सुविधा उपलब्ध है जिसमें मंदी के समय भी कमाया जा सकता है। 

  इसमें पहले बेचा जाता है और बाद में रेट गिरने पर उसी शेयर या इंडेक्स को कम रेट में खरीदकर सौदा स्क्वायर ऑफ करके प्रॉफिट बुक किया जा सकता है। 
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8. रिटायरमेंट की कोई ऐज लिमिट नहीं -

आप किस उम्र के हैं इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, यहां उम्र की कोई सीमा नहीं है और ना ही इस बात का बंधन कि आपको हमेशा यह काम करना ही है, यह पूरी तरह आपके ऊपर निर्भर करता है कि कितना और कब तक स्टॉक मार्केट में काम करना चाहते हैं अथवा नहीं।

  यहां आप जब चाहें तब अपने शेयर्स बेचकर या अपनी पोजीशन स्क्वायर ऑफ करके अपना काम बंद कर सकते हैं। यदि रात में आपके दिमाग में यह काम बंद करने का ख्याल आता है तो आप सुबह मार्केट खुलने पर अपने शेयर्स बेंच दें और अपनी ट्रेडिंग पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करके आसानी से बाहर आ सकते हैं आपसे कोई सवाल-जवाब नहीं होने वाला है। 

   दूसरे किसी बिज़नेस को बंद करने की स्थिति आने पर बाहर निकलना इतना आसान नहीं होता। वहां आपके लेनदार और देनदार होते हैं साथ ही बहुत से वर्कर्स या कर्मचारी भी आपसे जुड़े होते हैं। ये सब क्लियर करने में समय लग सकता है।

9. पूरी पारदर्शिता होती है -

ऑनलाइन शेयरों में ट्रेडिंग का एक और लाभ यह है कि किसी भी स्थान से ट्रेड करें, रेट में कोई अंतर नहीं होता। सभी को वही रेट दिखाई देगा जो उस वक़्त आपको स्क्रीन पर दिख रहा है। यह पूर्णतः आपकी मर्ज़ी पर होता है कि उस रेट में आपको शेयर्स बेचना/ खरीदना है या नहीं। 

  ट्रेडिंग में आपको अपना लॉस या प्रॉफिट भी तुरंत पता लग जाता है। अपने निवेश किये गए शेयर्स के रेट देखकर आप जान सकते हैं कि अभी  आप किस स्थिति में हैं।  यहां लाभ या नुकसान वास्तविक समय (Real time) में दिखाई देते हैं। 

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10. दस्तावेजों के ढ़ेर की आवश्यकता नहीं है -

किसी भी बिज़नेस में आपको कई प्रकार के लाइसेंस लेने पड़ते हैं और खाते बही मेन्टेन करने की आवश्यकता होती है। परन्तु शेयर मार्केट में काम करने पर आप इन झंझटों से मुक्त रहते हैं।  

   यहां प्रमाणपत्रों के ढेर की आवश्यकता नहीं है। आप ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करके दैनिक लाभ-हानि से लेकर मासिक लाभ-हानि तक सब कुछ एक्सेस कर सकते हैं। 

शेयर मार्केट के नुकसान  (Demerits of Share market)-


1. मुनाफे की गारंटी नहीं -

यहां FD की तरह आपकी निवेशित राशि में वृद्धि होगी ही, ऐसी कोई गारंटी नहीं होती। शेयर का भाव ऊपर और नीचे दोनों तरफ गति करता है। शेयर बाजार आपको किसी भी समय अपना स्टॉक बेचने की अनुमति देता है।

  परन्तु यदि आपको अचानक पैसे की जरूरत पड़ती है, तो चूंकि कीमतें अस्थिर होती हैं और हो सकता है उस समय उस शेयर का रेट बहुत कम चल रहा हो तब आप बेचते हैं तो नुकसान उठाने के लिए मजबूर होते हैं। 

    यदि कोई कंपनी खराब प्रदर्शन करती है, तो शेयर की कीमत किसी भी हद तक गिर सकती है और आप अपना लगभग पूरा निवेश खो सकते हैं। ऐसा तभी होता है जब आप निवेश करके भूल जाते हैं और समीक्षा नहीं करते या शेयर बेचकर निकलने की जगह "भाव वापस आ जायेगा" इस उम्मीद में बैठे रहते हैं। 

    आप चाहे प्रॉफिट में हों या लॉस में दोनों ही दशा में आपको ब्रोकरेज और गवर्नमेंट के टैक्सेस देने होते हैं। अगर आप निवेश करके पैसा बनाते हैं तब भी आपको कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।


2. यहां बड़ा लॉस हो सकता है -

अगर ट्रेडर अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रख पाता और किसी ट्रेड में अपना पूरा पैसा लगा देता है तब सौदा या दिशा गलत पड़ने पर उसे बहुत बड़ा लॉस सहना पड़ सकता है। ऐसा तभी होता है जब वह स्टॉप लॉस के नियम का पालन नहीं करता और एवरेजिंग करने लगता है। 

   इस प्रकार उसकी पिछली छोटी छोटी कमाई के साथ उसका मूलधन दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। यहां पैसा खोने का रिस्क हमेशा बना रहता है।  अनुभव की कमी और मनी मैनेजमेंट की समझ के बिना यह रिस्क बहुत बढ़ जाता है। 
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3. सफलता का फिक्स फार्मूला नहीं -

शेयर मार्केट प्रतिदिन नई चाल दिखाता है। इसकी भविष्यवाणी कोई एक्सपर्ट भी नहीं कर सकता, सिर्फ अनुमान लगा सकता है कि मार्केट ऊपर या नीचे किस तरफ का रुख कर सकता है। टेक्निकल एनालिसिस के एक्सपर्ट भी इसके बारे में भिन्न राय रखते हैं -एक कहेगा बाज़ार ऊपर जायेगा और दूसरा नीचे जाने का अनुमान व्यक्त करेगा। 

   कहने का अर्थ यह है कि अगर आप इंडीकेटर्स के सिग्नल के आधार पर कोई ट्रेड लेते हैं तो सफलता के चांस बढ़ते जरूर हैं परन्तु इससे सफलता की कोई गारंटी नहीं हो जाती। प्रतिपल बदलते मार्केट की चाल से थोड़ी देर में इंडीकेटर्स भी नया सिग्नल देने लगते हैं और आपको लॉस में भी अपने सौदे से एग्जिट करना पड़ सकता है।  

4. भावनात्मक रोलर कोस्टर -

शेयर बाजार में अनेक प्रकार के भ्रम -जाल हैं। एक ही न्यूज़ की प्रतिक्रिया अलग अलग समय में भिन्न प्रकार की होती है। कीमतें लगातार बढ़ती और गिरती रहती हैं। अगर आप बिना किसी प्लान के कोई सौदा लेते हैं और उसके बाद कीमतें आपकी सोची हुई दिशा के विपरीत चलती हैं तो हो सकता है आप भारी मानसिक तनाव फील करें। 

    यह आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। क्योंकि मार्केट बंद होने के बाद भी आपका अपने नुकसान के बारे में चिंतन जारी रहता है। साथ ही शेयर मार्केट में हुई अपनी इस हार को आप किसी से शेयर भी नहीं करना चाहते और खुद ही परेशान होते रहते हैं। इसलिए अपना प्रॉफिट और लॉस पहले से डिफाइन करके चलें। 

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   ऐसा नहीं करने पर आप अनिश्चय की स्थिति में होते हैं और निर्णय लेने में समय वेस्ट करते हैं कि लॉस बुक करके सौदे से बाहर निकलें या बने रहें। अगर बने रहते हैं तो लॉस और बढ़ सकता है या रेट वहां से रिवर्स होकर आपकी दिशा में भी चल सकता है। इसलिए अगर आपको पैसे खोने से डर लगता है और हानि बर्दाश्त नहीं कर पाते तो यह मार्केट आपके लिए नहीं है। 

    अगर आपको हारने से डर लगता है तो जीतने की आशा भी न रखें। यह भय और लालच का बाज़ार है, जिसे रेट ऊपर जाने का लालच होता है वह खरीदता है और जिसे रेट गिरने का भय होता है वह बेचता है। 

   ट्रेडिंग हो या इन्वेस्टिंग, स्टॉप लॉस का ध्यान रखें और निवेशक हैं तो प्रतिदिन शेयरों के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव को लगातार नहीं देखें, केवल कुछ अंतराल के बाद स्थिति की समीक्षा करते रहें। 

5. सामाजिक मान्यता का अभाव -

विदेशों की तुलना में भारत  में शेयर मार्केट में निवेश या ट्रेडिंग करने वालों की संख्या अभी बहुत कम है। ज्यादातर लोग इसे जुआ या गैंबलिंग समझते हैं क्योंकि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए शेयर बाजार से जुड़े लोगों को सामाजिक मान्यता प्राप्त नहीं हो पाती। 

   इसका एक कारण यह भी है कि सिर्फ पैसे कमाने के लिए लोग यहां चले आते हैं और उनका ध्यान इस बाज़ार के तौर तरीकों को समझने में बिलकुल नहीं होता, फलस्वरूप ऐसे लोग यहां घाटा उठाते हैं और मार्केट को भला बुरा कहते हैं। 

   इस बाज़ार की एक विशेषता यह भी है कि यहां आप कितना कमाते हैं या कितने नुकसान में हैं यह कोई नहीं जान सकता जब तक आप किसी को बताते नहीं हैं। 

 आशा है यह आर्टिकल "Start a Business or Share market-शेयर मार्केट के फायदे और नुकसान" आपको उपयोगी लगा होगा। इसे अपने मित्रों को शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल और सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। शेयर मार्केट के रहस्यों की जानकारी पाने के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें। 

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