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Saturday, 19 December 2020

Land Buying Tips-जमीन खरीदते समय कौनसी सावधानियाँ रखें

 Land Buying Tips-जमीन खरीदते समय कौनसी सावधानियाँ रखें 

रियल एस्टेट में निवेश करके आप अपने पैसों को सुरक्षित करने के साथ लम्बे समय में अच्छे रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। प्रॉपर्टी (Property) में निवेश (Investment) करके बहुत से लोग करोड़पति बने हैं। 


  विशेषकर जमीन (Land, Plot) में किया गया इन्वेस्टमेंट किसी मकान या फ्लैट में किये गए निवेश की तुलना में बहुत अच्छा रिटर्न देता हैं। परन्तु ऐसा तभी होता है, जब आप सही जमीन का चुनाव कर सकें। यानि वह जमीन, लोकेशन और रेट के हिसाब से ठीक हो और उसमें कोई कानूनी झमेला न हो। 


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   जमीन खरीदने में होने वाली किसी चूक से आप परेशानी में पड़ सकते हैं और आपका निवेश खतरे में पड़ सकता है। प्रॉपर्टी के नए निवेशक ही नहीं, कई बार पुराने इन्वेस्टर्स भी यहां फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं, यानि कह सकते हैं कि बड़े धोखे हैं इस राह में। 


  धोखे या फ्रॉड से बचने के लिए आपको प्रॉपर्टी खरीदी में बहुत सावधानी रखने की जरूरत होती है। आइये जानते हैं जमीन खरीदते समय या प्रॉपर्टी में निवेश करते समय कौनसी सावधानियाँ रखना आवश्यक है। 


जमीन कैसे खरीदें (Land Buying Tips)


1. अपनी जरूरतों के अनुरूप जमीन खोजें -


अगर आपको निकट भविष्य में मकान बनवाना हो अथवा थोड़े समय बाद प्लाट बेचकर पैसे खड़े करने हों, तब आपको शहर के भीतर या शहर से लगी सीमा में ही प्लाट खरीदना ठीक रहेगा। क्योंकि शहर से दूर किसी जमीन की तुलना में ऐसे प्लाट अपेक्षाकृत जल्दी बिक सकते हैं। 


  आप किसी ऐसे एरिया में प्लाट खरीद सकते हैं, जिसका लैंड यूज़ आवासीय हो और वहां नगर निगम से नक्शा पास होता हो। 


   अगर आप थोड़े लम्बे समय ( 5 वर्ष से अधिक) के लिए जमीन में निवेश करना चाहते हैं तो शहर की सीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी तक अपने बजट के अनुसार कृषि भूमि खरीद सकते हैं। 


  दूरी होने के कारण ऐसी जमीन के आसपास डेवलपमेंट होने में समय जरूर अधिक लगेगा, परन्तु आपको अपने निवेश का कई गुना रिटर्न प्राप्त होगा। ऐसी जमीन चुनें जो मुख्य सड़क से लगी हो व उसकी गहराई, चौड़ाई की तुलना में दो गुनी या अधिकतम तीन गुनी से अधिक न हो। 


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2. जमीन के पेपर्स की जांच करें -


A. ऑनलाइन रिकार्ड्स देखें -


जब आपको जमीन किसी एजेंट के जरिये अथवा सीधे किसी सेलर के द्वारा दिखाई जाती है और वह आपको पसंद आये तो पहले उस जमीन के पेपर्स देखें। 


   रजिस्ट्री के पेपर, ऋण पुस्तिका, खसरा खतौनी में जमीन का रकबा और मालिक का नाम देखें। अपने मोबाइल में लैंड रिकार्ड्स एप के जरिये भी जमीन मालिक और गांव का नाम डालकर खसरा, खतौनी (बी -1, पी-2) व नक्शा चेक करें। 


B. सर्च रिपोर्ट बनवायें -


एग्रीमेंट करने के पहले टोकन देकर जमीन का रेट फिक्स करके जमीन की सर्च रिपोर्ट बनवाने के लिए किसी वकील से सम्पर्क करें। जिससे आपको पता लगेगा कि पिछले वर्षों में यह जमीन कितनी बार बेचीं गई है और वर्तमान मालिक ने इसे खरीदा है अथवा उसे पैतृक रूप से प्राप्त हुई है। 


    किसी की मृत्यु होने पर प्राप्त जमीन में यह देखना होता है कि मृतक व्यक्ति के कितने वारिस थे। यदि विक्रेता के अलावा अन्य वारिस भी हैं तो क्या उन सबने विक्रेता को अपने नाम से जमीन चढ़वाने की अनुमति दी है? जमीन के संबंध में विक्रेता के ऊपर कोई कोर्ट केस तो नहीं चल रहा है इस बारे में जानकारी जुटाने में अपने वकील की मदद लें।  


    जमीन विक्रेता ने पहले किसी से कोई एग्रीमेंट जमीन बेचने के संबंध किया हो और उस एग्रीमेंट की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है, तो ऐसी जमीन न खरीदें। कई बार विक्रेता ऐसी जानकारी छुपा लेते हैं, इसलिए उनके गांव के लोगों और स्थानीय दलालों से बात करके सच्चाई जानने का प्रयास करें।


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C. क्या जमीन पर कोई लोन लिया है -


हो सकता है कि विक्रेता ने जमीन को गिरवी रखकर बैंक से कोई लोन लिया हो, ऐसी दशा में क्रेता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विक्रेता ने बैंक का पूरा लोन अदा कर दिया है और अब उस लैंड को मॉर्गेज करके लिए गए लोन का कोई बकाया नहीं है। 


   कई बार विक्रेता जमीन पर किसी बैंक से लोन ले लेता है और खरीददार को बिना इसकी जानकारी दिए उसे जमीन बेंच देता है। बाद में जब बैंक अपने पैसों की रिकवरी करने पहुंचता है, तब खरीददार को इसका पता चलता है। ऐसे में खरीददार को वह लोन पटाना पड़ता है अथवा जमीन उसके हाथ से निकल जाती है। 


   इससे बचने के लिए आप विक्रेता से उसकी मूल रजिस्ट्री की मांग करें, क्योंकि बैंक जब लोन देता है तो जमीन की ओरिजिनल रजिस्ट्री अपने पास रखवा लेता है। यदि विक्रेता रजिस्ट्री देने में आनाकानी करे या डुप्लीकेट रजिस्ट्री दिखाए, तब आपके पास संदेह करने का पर्याप्त कारण बनता है।


   यदि बैंक ने उस जमीन पर लोन दिए जाने की सूचना तहसील ऑफिस में दी होगी तब ऑनलाइन रिकार्ड्स देखकर आपको लोन का पता लग जाता है।  परन्तु कई बार बैंक ऐसा नहीं करते और इसका दुष्परिणाम क्रेता को भुगतना पड़ सकता है। 


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D. संयुक्त मालिक होने पर -


यदि जमीन किसी एक व्यक्ति के नाम पर न होकर दो या अधिक लोगों के नाम पर हो, तो एग्रीमेंट के समय सभी की सहमति और हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं। क्योंकि रजिस्ट्री के समय इन सभी का उपस्थित रहना जरूरी होगा, अन्यथा रजिस्ट्री रुक जाएगी। 


  यदि संयुक्त खाते में शामिल कोई व्यक्ति सिर्फ अपने हिस्से की जमीन बेचने की बात कहता है तब भी जमीन न खरीदें।  खातेदारों के आपसी बटवारा होने के बाद ही जमीन खरीदी जा सकती है।  


3. आम सूचना का प्रकाशन -


जमीन की रजिस्ट्री करवाने से पहले समाचार पत्र में जमीन की पूरी डिटेल और विक्रेता का पूरा परिचय देते हुए जमीन खरीदने संबंधी आम सूचना (Public Notice) का प्रकाशन करवाएं। जिससे उस जमीन के मालिकाना हक को लेकर किसी और का कोई दावा हो तो आपको पहले ही पता लग जायेगा। 


  इस आम सूचना के पूरे पेज को समाचार पत्र के नाम और दिनांक सहित संभलकर रखें, यदि आगे चलकर कोई कानूनी विवाद की स्थिति बनती है, तब कोर्ट में इसे अपने पक्ष में प्रस्तुत कर सकते हैं। 


4. जमीन की मार्किंग करवाएं -


जमीन की रजिस्ट्री करवाने से पहले पटवारी से उसकी नाप- जोख करवाएं।  जिससे आपको जमीन की सही लोकेशन और उसके वास्तविक क्षेत्रफल का पता लगेगा। कई बार जमीन, जितनी ऋण पुस्तिका में दर्शायी गई होती है, मौके पर नाप करने पर कम निकलती है। ऐसी स्थिति में आपको मौके पर उपलब्ध जमीन का ही पैसा विक्रेता को देना है। 


   मान लीजिये आप 10 लाख रूपये प्रति एकड़ की दर से ऋण पुस्तिका में दर्शायी गई 3  एकड़ जमीन का सौदा करते हैं। परन्तु मौके पर नाप करने पर वह जमीन ढाई एकड़ ही निकलती है, तो आपको उसका मूल्य 25 लाख रूपये ही चुकाना है न कि 30 लाख।


  जमीन की मार्किंग करवाने का एक लाभ यह भी है कि यदि आस- पास के किसी अन्य जमीन मालिक की कोई आपत्ति होगी, तो उसका पता समय रहते चल जायेगा। इस प्रकार मौके पर ही उसका निराकरण किया जा सकता है। 


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5. जमीन विक्रेता की जांच -


जमीन विक्रेता की सत्यता की जांच भी बहुत जरूरी है। आपको ये सुनिश्चित करना है कि जमीन के दस्तावेजों में उल्लेखित व्यक्ति से ही आप जमीन खरीद रहे हैं। 


  कई बार ठगी करने वाले लोग किसी दूसरे की जमीन, जाली आइडेंटिटी प्रूफ के जरिये बेंच देते हैं। इसलिए विक्रेता के निवास प्रमाण संबंधी पूरी जानकारी से संतुष्ट होने के बाद ही कोई कदम उठाएं। संदेह होने पर स्थानीय पुलिस थाने की मदद ले सकते हैं। 


  यदि किसी आदिवासी की जमीन है, तो बहुत से राज्यों में यह नियम है कि उसे कोई आदिवासी ही खरीद सकता है। केवल विशेष परिस्थिति में कलेक्टर की अनुमति से ही वह जमीन किसी अन्य को बेचीं जा सकती है।


  इसलिए आदिवासी की जमीन के संबंध में अपने वकील से नियमों की जानकारी प्राप्त कर लें। यदि जमीन, पावर ऑफ़ अटॉर्नी (मुख्त्यारनामा) के जरिये बेचीं जा रही है, तब विशेष सावधानी रखें।  


6. जमीन की रजिस्ट्री -


यह कार्य किसी दस्तावेज लेखक या वकील के माध्यम से करवाया जा सकता है। इसके लिए भूमि के नवीनतम निकाले गए पेपर्स (खसरा, नक्शा आदि) की जरूरत पड़ती है। साथ ही भूमि के चारों दिशा में किस तरफ सड़क है और किस दिशा में किन लोगों की जमीन आपकी भूमि की सीमा से टच करती है इसका विवरण लिख लें। इसे रजिस्ट्री में लगे नक्शे में दर्शाया जाता है। 


   रजिस्ट्री के लिए क्रेता -विक्रेता के फोटोग्राफ के साथ उनके ID प्रूफ और पैन कार्ड की आवश्यकता  पड़ती है। साथ ही दो गवाह भी उनके ID प्रूफ के साथ सब रजिस्ट्रार के ऑफिस में ले जाने पड़ते हैं। 


   शासन द्वारा घोषित (कलेक्टर गाइड लाइन) रेट के आधार पर आपको रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ता है, भले ही आपने उससे कम रेट में जमीन खरीदी हो। रजिस्ट्री के समय विक्रेता से उसकी पुरानी रजिस्ट्री भी प्राप्त कर लें। 


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7. जमीन का नामांतरण -


जमीन खरीदी में यह सबसे जरूरी पॉइंट है। रजिस्ट्री के पश्चात जमीन पर अपना कब्ज़ा करना और जमीन का नामांतरण करवाना आवश्यक होता है।  नामांतरण का अर्थ है तहसील के लैंड रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटाकर रजिस्ट्री के आधार पर नए जमीन मालिक का नाम दर्ज किया जाना। इसे म्यूटेशन, इन्तेकाल, दाखिल खारिज आदि नामों से भी जाना जाता है।


   कई बार एक जमीन कई लोगों को बेंच दी जाती है। इसका एक कारण जमीन खरीदने वाले द्वारा पटवारी के रिकॉर्ड में नामांतरण न करवाया जाना होता है।


    नामांतरण न करवाने पर पटवारी के रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज रहता है और इसी आधार पर वह जमीन को दोबारा बेंच देता है।


  अतः जमीन खरीदने के 15 दिन बाद तहसील कार्यालय या पटवारी से सम्पर्क करके जमीन का नामांतरण करवाना न भूलें। इसके लिए जमीन की मूल रजिस्ट्री साथ लेकर जाएँ। नामांतरण के पश्चात उस भूमि से जुड़ा नक्शा खसरा अपने नाम के साथ आपको मिल सकेगा।


  आशा है ये आर्टिकल  "Land Buying Tips-जमीन खरीदते समय कौनसी सावधानियाँ रखें"  आपको पसंद आया होगा और इससे आपकी जमीन खरीदने संबंधी शंकाओं का समाधान हो गया होगा। इस आर्टिकल को अपने मित्रों व परिवार के सदस्यों को शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल एवं सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विज़िट करते रहें। 


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