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Tuesday, 7 July 2020

Guidelines of Financial Planning-अपने पैसों का प्रबंधन कैसे करें

Guidelines of Financial Planning -अपने पैसों का प्रबंधन कैसे करें 

धन के महत्व से हम सभी परिचित हैं। यह हमारे वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है। धन को प्राप्त करने में जीवन का अधिकांश समय और ऊर्जा खर्च की जाती है। 

  धन कमाने के अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे विवेकपूर्ण ढंग से खर्च करना और अपनी बचत को सही तरीके से निवेश कैसे किया जाए, इसकी जानकारी होना। 
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फाइनेंसियल प्लानिंग क्या है -

पैसे खर्च करने की कला सीखे बिना व अपने पैसों को उचित तरीके से निवेश किये बिना कोई भी न अपने वर्तमान समय का आनंद ले सकता है और न ही अपने भविष्य को आशाजनक बना सकता है। 

  फाइनेंसियल प्लानिंग इसे हिंदी में वित्तीय योजना कहते हैं।  इसका अर्थ होता है अपनी धन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने की योजना बनाना और उस योजना पर चलकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना। 

फाइनेंसियल प्लानिंग क्यों आवश्यक है -

धन संबंधी बहुत सी आवश्यकताएं होती हैं जैसे -रेगुलर इनकम कैसे बनी रहे, दैनिक खर्च की व्यवस्था, धन का उचित निवेश, घर और गाड़ी खरीदना, आकस्मिक खर्च की व्यवस्था, बच्चों की पढ़ाई व शादी का खर्च, घूमने फिरने में होने वाला खर्च और आर्थिक आज़ादी प्राप्त करना व रिटायरमेंट की प्लानिंग आदि। आपके जीवन की आर्थिक सफलता आपके अच्छे वित्तीय प्लान पर निर्भर करती है। 

  अच्छे वित्तीय नियोजन (Financial Planning) द्वारा जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सुगमता होती है। यह देखा जा सकता है कि बुद्धिमानी से पैसे का प्रबंधन करना बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम हो सकता है। 

   व्यय प्रबंधन अपने पैसों का सही मूल्य प्राप्त करना और भुगतान के तरीकों अर्थात्, नकद, चेक, क्रेडिट कार्ड या मासिक किस्त (EMI) पर उचित निर्णय लेने के बारे में है।  इसके नियमों (Rules) को समझकर हम आसानी से अपने खर्च और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो सकते हैं। 

 अब प्रश्न उठता है कि अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे की जाए? वास्तव में हर किसी की अपनी जरूरतें, उम्र व आय के साधन अलग अलग होते हैं इसलिए कोई एक नियम सब पर लागू नहीं किया जा सकता। अपने गोल सेट करते समय आपको अपनी जरूरत, दक्षता और समय सीमा का ध्यान रखना होता है। 

  फाइनेंसियल प्लान एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें किसी एक लक्ष्य प्राप्ति के बाद बदलाव की जरूरत होती है। आय में होने वाला बदलाव, ब्याज दरों में होने वाला परिवर्तन व महंगाई जैसे कारक इस पर अपना प्रभाव डालते हैं। इसी प्रकार जब आपकी उम्र बढ़ेगी तो आपकी रिस्क उठाने की क्षमता भी कम होगी। आइये जानते हैं कि फाइनेंसियल प्लानिंग के महत्वपूर्ण सूत्र क्या हैं। 
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फाइनेंसियल प्लानिंग के महत्वपूर्ण सूत्र  (Important points of financial planning )-


1. आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन -

अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग करने के लिए आपको सबसे पहले अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करने की जरूरत है। इसमें यह देखना होगा कि आपकी वर्तमान आय और खर्चों में कितना समन्वय है। यानि क्या आप अपने खर्चे पूरा करके कुछ बचत कर पाते हैं या आपकी सारी कमाई आपके मकान और गाड़ी की किश्तों व बीमा की किश्तों को भरने में चली जाती है। 

   यदि आपने कुछ निवेश किये हुए हैं तो उनकी अभी क्या स्थिति है। इसके लिए आपको अपने नेटवर्थ पर गौर करना होगा। उसमें देखिये कि आपकी संपत्ति (Assets) और कर्जे या जिम्मेदारियां (Liabilities) कितनी हैं? या आपके पास कोई एसेट्स है अथवा नहीं? यदि एसेट्स है तो उसका वर्तमान मूल्य कितना है? 


   इस प्रकार आप अपनी वर्तमान स्थिति का आकलन करके यह जान पाते हैं कि आपके नेट वर्थ और कैश फ्लो की स्थिति क्या है साथ ही कौन से खर्चों में कटौती करके बचत की जा सकती है। अपनी वर्तमान स्थिति को सही तरीके से समझने के बाद ही आप अपने भविष्य की वित्तीय प्लानिंग कर सकते हैं। 
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2. फाइनेंसियल गोल्स का निर्धारण करें -

अपनी आर्थिक स्थिति को समझने के बाद अपने आर्थिक लक्ष्यों का निर्धारण करें। इसमें सबसे पहले आपके भविष्य में होने वाले सबसे जरूरी खर्चों को अपनी लिस्ट में शामिल करें। जैसे - मकान की व्यवस्था, बच्चों की शिक्षा, हेल्थ इन्शुरन्स, आपातकालीन फण्ड आदि। इसके बाद वाहन की खरीदी, देश विदेश की सैर जैसे लक्ष्यों के लिए कब और कितने फण्ड की आवश्यकता होगी इसे लिखें। 

    अब आपको अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के बीच कितना गैप है यह देखना होगा और वास्तविकता के आधार पर अपने लक्ष्यों की समीक्षा करनी होगी। 

  भविष्य में होने वाले किसी भी खर्च को पूरा करना हो या अपने किसी गोल को प्राप्त करना हो, यह आप तभी कर सकेंगे जब या तो आपकी आय बढ़े अथवा आप अभी से उतनी बचत करना प्रारम्भ करें। यहां बचत करने का विषेशज्ञों द्वारा बताया गया एक थंब रूल है जिसे अगले पॉइंट में समझते हैं। 
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3. अपनी आय का कितना बचाएं -

हर महीने कितना बचत और खर्च करना है? इस उलझन को समाप्त करने के लिए 50-20-30 का नियम है। इसके अनुसार आपकी आय का 50 प्रतिशत जीवनोपयोगी खर्चों में जाना चाहिए। जिसमें घरेलू खर्च, किराने का सामान, बिजली बिल आदि शामिल है। 

    20 प्रतिशत धन आपकी बचत में जाना चाहिए यह आपके छोटे, मध्यम और दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए है। शेष 30 प्रतिशत आपके आउटिंग, मनोरंजन और यात्रा  खर्च के लिए है। 

  बेहतर प्लानिंग के लिए व्यक्ति अपनी आयु, परिस्थिति आदि के अनुसार उपरोक्त प्रतिशत को कम या अधिक कर सकते हैं। जिसमें बचत को 30 प्रतिशत करते हुए आउटिंग और यात्रा  खर्च को 20 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है। 

   अगर सिर्फ बचत की बात की जाए तो आपको अपनी आय का 30% बचाना चाहिए। लेकिन यदि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम अपनी आय का 10% बचाना चाहिए। 

   यदि आप अपने करियर की शुरुआत में हैं, तो टैक्स को छोड़कर आय का कम से कम 10% बचाएं। जैसे-जैसे आय बढ़ती है, यह सुनिश्चित करें कि बचत, 15% तक हो जाये।  

  उम्र बढ़ने के साथ बचत बढ़ाते चलें और मध्य आयु में प्रवेश करने पर अपनी आय का 30% बचाएं, क्योंकि इस अवधि के दौरान खर्च आम तौर पर बढ़ जाते हैं।

   ठीक फाइनेंसियल प्लानिंग के लिए, अपने लक्ष्यों को मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित करते हुए पता करें कि आपको उनके लिए कितनी  बचत करने की आवश्यकता है। इस राशि को पहले ही बचत फण्ड में डाल दें फिर जो कुछ बचा है उससे अपने घरेलू खर्चों का प्रबंधन करें। इसे आप ऐसा समझें जैसे अपने लक्ष्यों के लिए भुगतान कर रहे हैं।

    अपनी बचत को छोटी व लम्बी अवधि के लक्ष्य पाने के हिसाब से अलग अलग तरीके से इन्वेस्ट करें। छोटी अवधि के लिए FD, एनएससी, पोस्ट ऑफिस स्कीम, शार्ट टर्म म्यूच्यूअल फण्ड प्लान आदि में निवेश कर सकते हैं। 

   वहीं लम्बी अवधि के लिए रियल एस्टेट, गोल्ड, पेंशन फण्ड, PPF, इक्विटी  डेट में निवेश किया जा सकता है। निवेश के लिए उन्हीं साधनों का प्रयोग करें जो आपके लक्ष्यों की समय सीमा के अनुसार रिटर्न दे सकें और जिनकी आपको जानकारी हो। 

   यदि आपको शेयर बाजार की जानकारी है और इक्विटी में निवेश करते हैं तो "100 - Age" नियम का पालन करें। इसका अर्थ है कि यदि आप 40 वर्ष के हैं, तो इक्विटी में 100-40 = 60%, अपनी निवेश योग्य राशि का निवेश करें। इसके साथ ही ध्यान रखें की इक्विटी निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए अपने निवेश की कुछ महिनों के अंतराल में समीक्षा करते रहें। 
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4.  72 का नियम याद रखें -

आपकी निवेशित रकम कितने वर्ष में दुगुनी हो जाएगी, इसे जानने के लिए 72 का नियम उपयोगी रहेगा। इसमें 72 को ब्याज की वार्षिक दर से विभाजित करना होगा।  इसे उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिये  आपने एफडी में निवेश किया है, जिसमें 6% वार्षिक ब्याज मिलता है, तो आपका पैसा 72/6 = 12 साल में दो गुना होगा। 

   यदि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, जो एक वर्ष में 8% का औसत रिटर्न देता है। इसमें आपका पैसा 72/8 = 9 साल में दो गुना हो जायेगा। मूल राशि को तिगुना करने के लिए आवश्यक समय जानने के लिए, 114 का नियम उपयोग किया जाता है। 8% वार्षिक के हिसाब से आपके पैसे को तिगुना करने के लिए आवश्यक समय  114/8 = 14.25 वर्ष होगा।
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5. आपातकालीन निधि (Emergency Fund) -

किसी भी फाइनेंसियल प्लानिंग में इमरजेंसी फण्ड की व्यवस्था करना आवश्यक होता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है इसकी आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है और इसमें तत्काल कार्रवाई के लिए धन की आवश्यकता होती है। बीमारी, एक्सीडेंट या कुछ महीनों तक बेरोजगार रहने के कारण किसी की भी आय क्षमता को झटका लग सकता है।

 एक मेडिकल इमरजेंसी में हेल्थ इन्शुरन्स होने के बावजूद क्लेम प्राप्त करने में समय लग रहा हो, या नियमों के अनुसार बीमारी की प्रतीक्षा अवधि जैसा मामला हो, किसी को भी स्थिति से निपटने के लिए धन की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। ऐसी दशा में घरेलू खर्चों को पूरा करना हो या EMI भरनी हो, एक आपातकालीन निधि का होना आवश्यक होता है। 

     भले ही यह आपके नियोजित लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से नहीं है, लेकिन यह आपको आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। स्वरोजगार और प्राइवेट कार्य करने वालों को अपने 6 से 12 महीने के घरेलू खर्च की राशि अपने आपातकालीन कोष में रखना चाहिए। यह राशि ऐसी जगह रखें, जहां से इसे निकालने में आपको परेशानी न हो। सेविंग एकाउंट इसके लिए बेहतर विकल्प है। 
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6. गृह ऋण (Home Loan) -

अगर आप अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग में लोन लेकर मकान लेने का सोचते हैं तो अपनी EMI का विचार कर लें। होम लोन पर EMI आपकी आय का 30% से कम होनी चाहिए। यदि अन्य लोन भी लिया है तो कुल ईएमआई, आदर्श रूप से मासिक आय का 50% से कम होना चाहिए। 


   बैंक भी ऋण देने से पहले उधारकर्ता की मौजूदा ऋण प्रतिबद्धताओं का पता लगाता है। बैंक भी उतनी ही राशि उधार देते हैं  जिस पर ईएमआई, मासिक आय के 45-50 प्रतिशत से अधिक न हो। इसमें पूर्व में लिए गए कार या व्यक्तिगत ऋण व कोई अन्य ऋण के साथ लेने वाले ऋण की ईएमआई शामिल है। बैंक या एनबीएफसी में होम लोन के लिए आवेदन तभी करें जब आपका क्रेडिट स्कोर 750 या इससे अधिक हो, नहीं तो आपका आवेदन अस्वीकार भी हो सकता है।

 7. 20/4/10 का नियम-

कार खरीदते समय आपको 20/4/10 का नियम पैसा बनाए रखने में मदद करता है। इस नियम के अनुसार आपको डाउन पेमेंट के रूप में कार की लागत का कम से कम 20% भुगतान करना चाहिए। वैसे  जितना अधिक संभव हो उतना डाउन पेमेंट करने का प्रयास करें, क्योंकि डाउन पेमेंट जितना अधिक होगा, उतनी ही कम लोन ईएमआई (EMI) होगी।

    पुनर्भुगतान के तनाव को कम करने के लिए 4 साल की पुनर्भुगतान अवधि के लिए ऋण लेना सबसे बेहतर होता है। वहीं वेतन का 10% आप कार लोन की  ईएमआई के लिए उपयोग कर सकते हैं।

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8. रिटायरमेंट प्लानिंग -

आपको अपने रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना जरूरी है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपकी सारी बचत बच्चों की पढ़ाई, शादी या घूमने फिरने में खर्च हो जाए।रिटायरमेंट के बाद आर्थिक आज़ादी के लिए आपके पास रेंटल इनकम, पेंशन प्लान, इक्विटी, गोल्ड जैसे साधन होने चाहिए जिससे आपका गुजारा ठीक से चल सके। 

अधिकांशफाइनेंसियल प्लानर, रिटायरमेंट के लिए व्यक्ति की वार्षिक आय का लगभग 20 गुना राशि रखने की बात कहते हैं। तभी वह मुद्रास्फीति को बीट कर सकेगा। इसके लिए आपको अपनी रिटायरमेंट से बहुत पहले प्लान करने की जरूरत होगी। 

9. धन प्रबंधन के सुनहरे नियम -

A. सबसे अच्छा सौदा प्राप्त करें -

पैसा बचाने और सबसे अच्छा सौदा पाने में अधिकतम जानकारी लेकर सौदेबाजी करना महत्वपूर्ण होता है। हमें अपने द्वारा लिए जाने वाले  उत्पादों या सेवाओं के लिए पूछताछ करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

    उदाहरण के लिए, हम होटल बुकिंग के मामले में सीधे होटल से सम्पर्क करने पर मिलने वाले डिस्काउंट के बारे में मैनेजर से बात कर सकते हैं।  उपभोक्ताओं को उत्पादों पर मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य पर छूट की मांग करने का भी अधिकार है।

B. अपने नियमित खर्चों को एक सीमा में रखें ताकि वे नियंत्रण से बाहर न हों। मूल्यवान वस्तु खरीदते समय विभिन्न भुगतान विकल्पों जैसे कि शून्य-ब्याज ईएमआई देखें।

C. ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये हम वेब पर अच्छे सौदे प्राप्त कर सकते हैं। इंटरनेट हमें विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की कीमतों की तुलना करने और सबसे अच्छा विकल्प चुनने की अनुमति देता है।
   
D. इंश्योरेंस प्रोडक्ट या घर खरीदने के दौरान ब्रोकरेज को बचाने में इंटरनेट भी आपकी मदद कर सकता है। फ्लैट को किराए पर देने और लेने के अलावा हम  इंटरनेट के माध्यम से अन्य परिसंपत्तियों को खरीद / बेच सकते हैं और ब्रोकरेज बचा सकते हैं। 

  आशा है ये आर्टिकल "Guidelines of Financial Planning-अपने पैसों का प्रबंधन कैसे करें " आपको उपयोगी लगा होगा। इसे अपने मित्रों तक शेयर कर सकते हैं। अपने सवाल एवं सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखें। ऐसी ही और भी उपयोगी जानकारी के लिए वेबसाइट पर विज़िट करते रहें।

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